पिछला भाग पढ़े:- एक फैमिली ऐसी भी-28
चुदाई कहानी अब आगे-
मौसी बता रही थी, “धीरज मेरी और जीजा जी की चुदाई तो हो ही चुकी थी, और जीजी भी इस चुदाई के बारे में जान भी चुकी थी।”
“पता नहीं क्या सोच कर जीजी बोली, “बोलो यश, लेना है मजा बीवी और साली को इकट्ठे एक-दूसरे के सामने चोद कर?”
“जीजा जी को समझ नहीं आया कि जीजी ये क्या और क्यों कह रही थी। एक-दूसरे के सामने चुदाई – जरूरत क्या थी?”
“धीरज सच कहूं तो जीजी की बात समझ मुझे भी नहीं आयी थी कि जीजी की इस बात का मतलब क्या था – मस्त मजा, बीवी और साली को इकट्ठे चोद कर, एक-दूसरे के सामने? क्यों जीजी ऐसी बात कर रही थी?”
“हमें चुप देख कर जीजी ने साफ़ ही बोल दिया, “यश क्या बात है चुप क्यों हो तुम लोग? ऐसा भी मैंने क्या बोल दिया जो तुम लोगों को समझ नहीं आ रहा? मैं तो बस ये कह रही हूं कि आज तुम मुझे हुए कौशल्या को इकट्ठे एक ही कमरे में, एक ही बिस्तर पर, एक-दूसरे के सामने चोदो और मजे लो दो-दो चूतों को बेखटके चोदने के।”
जब जीजा जी इसके बाद भी चुप रहे फिर तो जीजी बोली, “अभी भी समझ आया या नहीं आया यश? आज मैं और कौशल्या इकट्ठे तुमसे चुदाई करवायेंगी – एक-दूसरे के सामने। इसमें क्या समझ में नही आ रहा तुम लोगों को जो तुम्हारी गांड फटी पड़ी है?”
“मैं और जीजा जी जीजी के इस बात पर हैरान थे। जीजी तो जैसे बम्ब पर बम्ब फोड़ रही थी, और मजे की बात ये थी कि मुझसे तो कोइ पूछ ही नहीं रहा था। पर इतनी बात तो जरूर थी धीरज, जीजी की बातें सुन-सुन कर मेरी फुद्दी में आग लगनी शुरू हो चुकी थी।”
“हमें तो समझ ही नहीं आ रही थी कि हम बोलें भी तो क्या बोलें। तभी अचानक से जीजी धीरे से बोली, “यश एक बात और बताऊं, तुम्हारी कौशल्या के साथ हुई इस चुदाई ने एक चुदाई का रास्ता और भी खोल दिया है।”
“जीजी की यह बात भी मुझे तो समझ नहीं आई, शायद जीजा जी को भी समझ नहीं आयी थी। जीजा जी हैरानी से बोले, “कैसा रास्ता सुधा, कौन सा रास्ता?”
“जीजी बोली, “वो मैं बाद में बताऊंगी – पहले तो तुम ये बताओ, क्या सोच कर तुमने कौशल्या को चोद दिया – यही कि साली आधी घरवाली होती है – पकड़ो और रगड़ दो। साली चोदने में जो रोमांच होता है, वो घरवाली को चोदने में नहीं होता। वैसे भी कहते ही हैं घर की मुर्गी दाल बराबर होती है?”
“जीजी की इस बात पर जीजा जी चुप हो गए, मैं भी चुप ही थी। मैं सोच रही थी असल में हुआ तो यही था।”
“मगर फिर भी – जब जीजी ने कहा था, “यश तुम्हारी कौशल्या के साथ हुई इस चुदाई ने एक चुदाई का रास्ता और खोल दिया है, तो कम से कम मैं तो हैरान हो गयी ये सोच कर कि ऐसे कौन से रास्ते की बात कर रही थी जीजी?”
“जीजा जी को चुप देख कर जीजी बोली, “अब मैं ही अपनी इस बात का जवाब दे देती हूं, तुम्हारी तो लगता है आज बोलती ही बंद है।”
इसके बाद जीजी की अंदर की मास्टरनी बोली, “यश तुम मुझे चोद रहे थे, कौशल्या मनोहर से मस्त फुद्दी और गांड चुदवा रही थी, फिर भी तुमने आपस में चुदाई कर ली? कभी सोचा है ऐसा क्यों हुआ?”
“मैं और जीजा जी चुप थे – जवाब देते भी तो क्या देते?”
“जीजी ही बोली, “यश ऐसा इसलिए हुआ क्यों की हर इंसान कुछ नया चाहता है, कुछ अलग करना चाहता है। कौशल्या की मनोहर के साथ मस्त चुदाई हो रही थी, मगर उसे कुछ नया चाहिए था। इसी तरह, तुम भी मेरी मस्त चुदाई कर रहे थे, मगर तुम्हें भी कुछ नया चाहिए था। उधर इक्कीस साल के जवान कौशल्या ने अपनी फुद्दी तुम्हें प्लेट में सजा कर परोस दी – ऐसे में तुम क्या यश कोइ भी होता तो इस कौशल्या को चोद ही देता। बस यही हुआ तुम्हारे साथ भी – जो तुम्हारी और कौशल्या की चुदाई हो गई।”
“जीजा जी बड़े मुश्किल से बोले, “सुधा असल में हुआ तो यही है। कौशल्या को यहां देख कर मुझसे रुका नहीं गया और कौशल्या ने भी मुझे चुदाई की लिए मना नहीं किया।”
“इसके बाद जीजी हल्की सी हंसी और बोली, “अरे छोड़ो यार यश – ये कोइ नई बात नहीं, मैं तो कह ही रही हूं जवान साली जवान जीजा से कब तक बची रह सकती है। यही हमारे यहां का दस्तूर है – यही हमेशा से होता आया है जीजे सालियों को चोदते ही हैं।”
“फिर जीजी जीजा जी से बोली, “चलो रात हो गयी है, चलो मजा दो हम दोनों को अपने घरवाली को और आधी घरवाली को – चोदो हमें एक-दूसरे के सामने। चलो उठो, अंदर चलते हैं।”
“इसके बाद भी जब जीजा जी नहीं हिले तो जीजी उठी और पायजामे के ऊपर से ही जीजा जी का लंड पकड़ कर बोली, “अरे अब उठ भी जाओ, कब तक देवदास बने बैठे रहोगे? ऐसे में तो लंड भी नहीं खड़ा नहीं हो पायेगा।”
“जीजा जी हिले तो नहीं, मगर इतना ही बोले, “सुधा ये क्या कर रही हो? कौशल्या बैठी है?”
“जीजी बोली, अरे! यश कौशल्या बैठी है तो? कौशल्या से अब शर्म कैसी? वो तो फुद्दी और गांड मुंह में सब जगह तुम्हारा ये लंड ले चुकी है। उससे अब क्या पर्दा?”
फिर जीजी मुझसे बोली, “क्यों कौशल्या, ठीक कहा ना मैंने?”
“धीरज उस वक़्त तो मुझे समझ ही नहीं आया कि जीजी मुझे ये ताना दे रही थी या संजीदा थी – और सच में ही जीजा जी से मेरी और अपनी इकट्ठी चुदाई करवाना चाहती थी। लेकिन धीरज सच बताऊं उस वक़्त मुझे शर्म भी आ रही थी। ये सब कुछ जो हो रहा था सब मेरी और जीजा जी की चुदाई के कारण हो रहा था।”
“मगर धीरज जीजी नार्मल हो चुकी थी थी। जीजी बोली, “इतना भी यश क्या सोच रहे हो, किस बात की हिचकिचाहट है यार? मेरी फुद्दी चोद चुके हो, गांड अगर नहीं चोदी तो वो लिए क्यों कि गांड चुदाई का ना तुम्हें शौक है और ना ही मुझे। मगर मुझे चोदते हुए मेरी गांड में उंगली तो डालते ही हो। और अब कौशल्या की भी फुद्दी और गांड दोनों चोद चुके हो। मैं तो बस इतना बोल रही हूं, जो काम तुमने अब तक अकेले में किया है वो एक-दूसरे के सामने करो, खुद भी मजा लो हम दोनों को भी मजा दो। कौशल्या की गांड भी चोदो, मेरी गांड में भी लंड डाल लो।”
“जब जीजा जी जीजी की इस बात पर भी सोचते ही रहे तो जीजी बोली, “हद्द ही है यार – दो जवान लड़कियां फुद्दी खोल कर तुम्हें चुदाई के लिए बुला रही हैं, और तुम इतना सोच रहे हो?”
“फिर जीजी खड़ी होती हुई बोली, “ठीक है अब तो मुझे ही कुछ करना पड़ेगा। मैं ही तुम लोगों का मूड बदलती हूं।”
“इतना बोल कर जीजी कोने में रखी अलमारी की तरफ चली गयी। इस अलमारी में जीजा जी की शराब की बोतलें रखी रहती थी। जीजी जोनी वॉकर स्कॉच और मालाबार जिन की दो बोतलें ले आयी, और बोली, जा कौशल्या तीन गिलास, फ्रिज में से सोडा और पेप्सी ले आ। अभी तेरे जीजा जी का लंड तैयार करती हूं।”
“मुझे हैरानी हो रही थी कि जीजी ये क्या कर रही थी। मुझे पता नहीं था कि जीजी पीती भी है, और मैंने कभी एक आध बार ही पी थी वो भी मनोहर ने जबरदस्ती पिला दी थी।”
“फिर भी मैं उठी और तीन गिलास, सोडा और पेप्सी ट्रे में लेकर आ गयी। मैं सोच रही थी आज कुछ अलग ही करने वाली थी जीजी – कुछ अलग तरह की चुदाई। मेरी फुद्दी में तो धीरज बाढ़ भी आने लग गयी थी।”
“जीजी ने जीजा जी के गिलास में व्हिस्की और मेरे और अपने गिलास में जिन डाल दी। जीजी ने गिलास उठा कर जीजा जी के हाथ में पकड़ा दिया। जीजा जी के गिलास में खाली व्हिस्की थी – ना सोडा ना पानी।”
“जीजा जी बस इतना ही बोले, “सुधा ये?”
“जीजी बोली, “यश अब “ये – वो” छोड़ो, और पियो।”
“जिस तरह से जीजी ने मेरे सामने पायजामें के ऊपर से जीजा जी का लंड पकड़ा था और जिस तरह की बातें जीजी कर रही थी, उससे जीजा जी अब कुछ कुछ मूड में आ चुके थे। जीजा जी के पायजामें खड़े होते लंड का उभार दिखाई देने लग गया था। जीजा जी ने गिलास उठाया और एक ही घूंट में गिलास खाली कर दिया।”
“हमारा एक पेग खत्म हुआ तो जीजी ने एक-एक पेग और बना दिया। पहले की ही तरह जीजी ने जीजा जी का आधा गिलास व्हिस्की से भर दिया। ये दूसरा पेग भी खत्म हो गया।”
“दो पेग पीने के बाद सब सुरूर में आ गए। जीजा जी तो कुछ ज्यादा ही सुरूर में लगने लगे थे। जीजी जीजा जी का पेग तो वैसे ही बड़ा बना रही थी। उधर जीजा जी बिना पानी सोडा मिलाये व्हिस्की नीट ही पी रहे थे। जीजा जी की आँखें गुलाबी हो गई। जीजी जीजा जी को नीट पीने से रोक नहीं रही थी, शायद जीजा जी का मूड हल्का करना चाहते थी और जान-बूझ कर जीजा जी को नीट पीने दे रही थी।”
“सुरूर में आये जीजा जी ने दो पेग पीने के बाद तीसरा पेग खुद ही बना लिया। जीजा जी ने आधा गिलास इसके से भर लिया और नीट ही पी गए।”
अचानक जीजी उठी और अपने सारे कपड़े उतार कर बोली, “चल कौशल्या तू भी उतार अपने कपड़े और चल अंदर, आज तेरे जीजा जी से ऐसी चुदाई करवाएंगे दोनों बहने कि यश को जन्नत का मजा आ जाए। भूलेंगे नहीं ये आज की चुदाई।”
“धीरज, जीजी को इस तरह बातें करते सुन कर मुझ पर भी इकट्ठी चुदाई की ठरक चढ़ गयी। मैं भी उठी और मैंने भी अपने सारे कपड़े उतर दिए। दो-दो जवान औरतें – औरतें क्या लड़कियां ही थी। जीजी तेईस की थी और मैं इक्कीस की। हमें इस तरह नंगा अपने सामने देख कर जीजा जी से रहा नहीं गया और जीजा जी ने भी कपड़े उतार दिए, और वापस कुर्सी पर बैठ गए।”
“जीजा जी ने अपना गिलास खाली किया और उसमे एक पैग और बनाया और नीट ही चढ़ा गए।”
“हम तीनों डाइनिंग टेबल पर ही नंगें बैठे हुए थे – अजीब ही सीन था।”
“तीन चार पेग नीट पीने के बाद जीजा जी नशे में आ चुके थे।”
“नशे में जीजा जी जीजी से बोले, “हां तो मादरचोद सुधा, क्या कहा था तुमने? आज तेरे जीजा जी से ऐसी चुदाई करवाएंगे दोनों बहने कि यश को जन्नत का मजा आ जाए। भूलेंगे नहीं ये आज की चुदाई।” यही कहा था ना तुमने मेरी जान? चलो अब तैयार हो जाओ दोनों बहनें, तुम दोनों की गांड और फुद्दीयों में लौड़ा डालता हूं आज, वो भी एक-दूसरी के सामने। ये बोल कर जीजा जी खड़े हो गए और जीजी के सामने आ गए। जीजा जी का लंड बिलकुल सीधा खड़ा था। जीजी ने कुर्सी पर बैठे-बैठे ही वहीं जीजा जी का लंड मुंह में ले लिया।”
“जीजी की मस्त चुसाई से जीजा जी के मुंह से आह सुधा, आह सुधा निकलने लगा।”
“जीजी की थोड़ी लंड चुसाई के बाद जीजा जी ने लंड जीजी के मुंह से निकाला और मेरे सामने आ गए और बोले, “ले मादरचोद तू भी ले, तू ही क्यों पीछे रहे। मैंने जीजा जी का लंड मुंह में लिया और चूसने लगी।”
“थोड़ी लंड चुसाई के बाद जीजा जी बोले, “चलो अब अंदर, चलो सोफे पर चूतड़ पीछे करके लेट जाओ। आज गांड से ही शुरू करते हैं। आज तुम्हारी गांडों का भोंसड़ा बनाता हूं।”
“जीजी बोली, “वाह ये हुई ना बात यश, मजा ही आ गया।”
जीजी मुझसे बोली, “चल कौशल्या उठ, आजा।”
“इसके बाद हम तीनो – जीजा जी, मैं और जीजी अंदर आ गए। जीजी ने मुझसे कहा, “कौशल्या, नशे में आज यश का लंड जल्दी नहीं झड़ने वाला अब बता कहा डलवाना है फुद्दी में या गांड में। यश तो गांड चोदने के पूरे मूड में लग रहा है।”
“मैंने कहा, “जीजी आज जीजा जी गांड से शुरू करेंगे – ऐसा लगता है। फिर मैंने कहा, “जीजी मुझे तो गांड चुदवाने के आदत है, आप अपना सोचो।”
“जीजी बोली, “कौशल्या कब तक बचेगी मेरी ये गांड लंड से, कभी ना कभी अगर गांड चुदाई होनी ही है – तो फिर आज ही क्यों नहीं?”
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