पिछला भाग पढ़े:- एक फैमिली ऐसी भी-27
चुदाई कहानी अब आगे-
मौसी कौशल्या अपनी और अपने जीजा जी यानी मेरे पापा के साथ हुई पहली चुदाई की कहानी सुना रही थी।
मौसी बता रही थी, “धीरज उस शनिवार को जब मैं गुडगांव पहुंची तो जीजी घर पर नहीं थी और मैं और जीजा जी घर में अकेले ही थे।”
“हम बाहर डाइनिंग टेबल पर बैठे थे। जीजा जी अजीब सी ही नज़रों से मुझे देख रहे थे, और बार-बार अपना लंड खुजला रहे थे। जीजा जी के मुझे इस तरह देखने और बार-बार लंड खुजलाने से मुझे अजीब सा मजा आ रहा था। धीरज, फुद्दी तो मेरी भी गीली हो चुकी थी। मैं भी बीच-बीच में अपनी फुद्दी पर हाथ फेर रही थी।”
फुद्दी पर हाथ फेरते हुए मैंने हंसते हुए जीजा जी से पूछा, “और जीजा जी आप आज घर पर कैसे?”
“मेरे इतना कहने भर की देर थी कि जीजा जी ने मुझे पकड़ लिया और, “बताता हूं” बोल मेरे मम्मे दबा दिए।”
“मैंने हंसते कहा, “क्या हुआ जीजा जी, जीजी की याद आ रही है? रात का इंतजार तो कर लो, जीजी कहीं भागी तो नहीं जा रही।”
“जीजा जी बोली, रात की रात को देखेंगे, अभी तो तुम आओ।” कह कर जीजा जी ने मेरे होंठ अपने होंठों में ले लिए। जीजा जी का एक हाथ अब भी मेरे मम्मों पर ही था।”
“जैसे ही जीजा जी ने मेरे होंठ छोड़े, मैं हंसने लगी और बोली, “क्या हुआ जीजा जी?”
“लड़की अगर हंस दी तो समझो वो राजी है।”
“धीरज, जीजा जी बोले, कौशल्या चलो अंदर चलते हैं। अंदर चल कर बताता हूं। जीजा जी मुझे चोदने के मूड में आ चुके थे। जीजा जी से चुदाई के लिए तो हमेशा से तैयार थी ही।”
“जैसे ही जीजा जी बोले, “चलो कौशल्या अंदर चलते हैं, मुझे क्या ऐतराज़ होना था। जीजा जी के ऐसा कहते ही मैं खड़ी हो गयी।”
“मैं आगे-आगे और जीजा जी पीछे-पीछे चल पड़े। चलते-चलते जीजा जी ने मेरे चूतड़ों में उंगली डाल दी। मैंने सर पीछे घुमा कर हंसते हुए कहा, “जीजा जी अंदर जाने तक तो सबर कर लो। अब चल तो रहे ही हैं, इसमें भी डाल लेना। इसमें भी डलवाती हूं मैं।”
“जीजा जी बोले, “वाह कौशल्या, बहुत आगे तक चली गयी तू तो।”
“अब इस पर क्या बोलती मैं? मेरी गांड तो तेरे मौसा मनोहर ने पहले दिन ही फाड़ दी थी। फिर भी मैंने कहा, “जीजा जी, जब “करवानी” ही है तो नखरा कैसा?”
“मुझे “चुदाई करवानी ही है” बोलने में मुझे थोड़ी हिचकिचाहट सी हो रही थी।”
“जीजा जी तो जैसे मेरी फुद्दी चोदने के लिए कुछ ज्यादा ही जल्द-बाजी में थे।अंदर पहुंचते ही जीजा जी ने अपने कपड़े उतार दिए और मेरी सलवार का नाड़ा खोलने लगे। सलवार का नाड़ा जैसे ही खुला, सलवार नीचे ढलक गयी। जीजा जी ने मेरी चढ्ढी भी नीचे सरका दी और अपनी उंगली से मेरी फुद्दी टटोलने लगे।”
“अब खड़ी लड़की की फुद्दी में तो उंगली जा नही पाती। उधर मैं तो पूरी मस्ती मैं आ ही चुकी थी। मैंने अपनी एक टांग उठाई और सोफे पर रख दी और हंसते हुए बोली, “लो जीजा जी अब डालो जहां डालनी है – आगे पीछे जहां भी, सब जगह जाएगी आपकी उंगली अब। ये बोल कर मैं फिर से हंस दी।”
“जीजा जी ने उंगली मेरी फुद्दी मैं डाल दी। जीजा जी से चुदाई करवाने के ख्याल से मेरी फुद्दी पानी से भरी पड़ी थी। जीजा जी बोली, “कौशल्या, ये तो तैयार है।”
मैंने वैसे ही हंसते हुए कहा, “जीजा जी ये तो आपकी और जीजी की शादी के बाद से ही तैयार है, जीजी ने ही नहीं लेने दिया आपका लंड इसमें। आज तो मस्त मजा दे ही दो जीजा जी – आगे का भी और पीछे का भी। ये कह कर मैंने ऊपर के कपड़े भी उतार दिए।”
“मेरे कपड़े उतारते ही जीजा जी ने मुझे सोफे पर बिठा दिया अपना लंड मेरे मुंह में डाल दिया। मैंने भी मस्त हो कर बड़े शौक से जीजा जी का लंड चूसा। जल्दी ही जीजा जी बोले, बस कौशल्या, चलो अब थोड़ी अपने फुद्दी चुसवाओ, फिर चुदाई करें।”
“मुझे तो वैसे ही जीजा जी से चुदाई की जल्दी थी, मैं उठ गयी और बेड के किनारे पर टांगें उठा कर लेट गयी। तेरे मौसा जी ऐसे ही मेरी फुद्दी चूसते चाटते थे। जीजा जे ने जैसे ही मेरी फुद्दी देखी, फुद्दी चुसाई तो वो भूल गए सीधा लंड फुद्दी मैं डाल कर चुदाई शुरू कर दी।”
“जीजा जी जोर-जोर से मेरी फुद्दी चोद रहे थे। जीजा जी के लंड के ऐसे जोरदार धक्के, मेरी फुद्दी दस मिनट भी नहीं झेल पायी और मेरी फुद्दी पानी छोड़ गयी। मेरे चूतड़ अपने आप ही घूमे और मेरे मुंह से सिसकारी निकली, “आह जीजा जी मजा आ गया, निकल गया मेरी फुद्दी का पानी।”
“जीजा जी ने चुदाई रोक दी। जैसे ही मैं जरा सी ढीली हुई। जीजा जी ने खड़ा लंड मेरी फुद्दी में से निकाला और नीचे बैठ मेरी फुद्दी चूसने लगे। जल्दी ही मेरी फुद्दी फिर से तैयार हो गयी। जैसे ही मैंने जरा से चूतड़ घुमाये, जीजा जी खड़े हो गए और बोले, “चलो कौशल्या, अब सही ढंग की चुदाई करेंगे।”
“सही ढंग के चुदाई, मतलब मैं सीधी लेट जाऊं, चूतड़ों के नीचे तकिया रख कर फुद्दी उठा दूं, और जीजा जी मुझे मेरे ऊपर लेट कर मेरी चुदाई करें।” मनोहर को भी ऐसे ही चोदना अच्छा लगता है – सभी मर्दों को लगता है।”
“मैंने कहा, “ठीक है जीजा जी, मगर याद रखना गांड में भी डालना है आज अपने।”
जीजा जी बोले, “कौशल्या सुधा की गांड में तो मैं नही डालता, उसने कभी कहा ही नहीं पर आज तेरी गांड चुदाई का मजा मैं जरूर लूंगा।”
“बस धीरज, इसके बाद जीजा जी ने मुझे दो बार और चोद दिया – दो बार मेरी फुद्दी का पानी छुड़ाने के बाद जब मुझे चौथी बार मजा आया, तो मैंने फिर से जीजा जी को पूछा, “जीजा जी गांड में नहीं डालोगे?”
जीजा जी का लंड तो खड़ा ही था। जीजा जी ने भी वही जवाब दिया बोले, “कौशल्या, आज लंड का पानी तेरी गांड में ही निकालूंगा।”
“फिर जीजा जी जैसे अपने आप से ही बोले, “सुधा की गांड में तो मैं नहीं डालता। वो कहती ही नहीं गांड में डालने को। जहां तक मुझे याद है, सिर्फ एक बार मैंने सुधा की गांड में लंड डाला, वो भी उसने नहीं कहा था। उसके बाद ना उसने गांड चुदवाने के लिए कभी कहा ही नहीं और ना ही मैंने ही कभी सुधा से उसकी गांड चोदने की बात की।”
“मैंने हैरानी से पूछा, “जीजा जी जीजी गांड में नहीं लेती? कमाल है। मेरी और मनोहर की तो गांड चुदाई के बिना चुदाई ही पूरी नहीं होती।”
“जीजा जी बोले, “कोइ बात नहीं कौशल्या, आज मैं भी लूंगा तेरी गांड चुदाई का मजा। चल आजा बोल कैसे डालूं तेरी गांड में।”
“मैं जा कर सोफे पर चूतड़ पीछे करके लेट गयी और दोनों हाथों से अपने चूतड़ चौड़ी करके बोली, “आ जाओ जीजा जी।”
“धीरज इतनी चुदाईयों के बाद भी जीजा जी का लंड खूंटे की तरह खड़ा था।”
“जीजा जी ने मेरी गांड में थूक डाला और एक झटके में पूरा लंड गांड के अंदर बिठा दिया।”
इसके बाद तो हमारी मस्त गांड चुदाई हुई। उस दिन हर जगह लंड डाला जीजा जी ने जहां भी लंड जा सकता था – फुद्दी में, गांड में, मुंह में – बस ये समझो धीरज मजा ही आ गया।”
“मेरी और जीजा जी की चुदाई को चार घंटे हो चुके थे। चार चुदाईयां हो चुकी थी। शाम होने को थी। जीजी कभी भी आ सकती थी।”
“मैंने और जीजा जी ने कपड़े पहने हुए बाहर आ कर डाइनिंग टेबल पर बैठ गए। मैं चाय बना कर ले आई। अभी हम चाय पी ही रहे थे कि जीजी आ गयी।”
“मुझे देख कर जीजी बोली, “अरे कौशल्या तू? तू कब आयी?”
“मैंने कहा, “जीजी मैं तो दोपहर को ही आ गयी थी, मुझे तो पता ही नहीं था कि आपकी कोइ ट्रेनिंग-व्रेनिंग है।”
“जीजी कुछ चुप सी हो गयी – जैसे कुछ सोच रही थी।”
“फिर कुछ रुक कर जीजी बोली, “कौशल्या, तेरे जीजा जी ने तंग तो नहीं किया तुझे?”
“जीजी की बात सुन कर मैं तो एक-दम हड़बड़ा सी गयी और बोली, “अरे नहीं जीजी, जीजा जी भला मुझे क्यों तंग करेंगे?”
“मगर मेरी हड़बड़ाहट और जीजी का मास्टरी का तजुर्बा – जीजी ने सीधा जीजा जी से ही पूछ लिया, “क्यों यश मजा आया साली को चोदने का?”
“जीजी ने इतना साफ़ पूछा कि जीजा जी की तो एक तरह से गांड फट गयी। जीजा जी भी हड़बड़ा गए और जीजा जी ने हकलाते हुए पूछा, “अरे सुधा ये क्या बात कर रही हो?”
“जीजी बोली, “छोड़ो यश, मुझे तुम लोग कुछ नहीं छुपा सकते। ये कौशल्या तो अपनी शादी से पहले ही तुमसे चुदवाना चाहती थी, मैंने ही रोका हुआ था इसे – आज मौक़ा मिला तो क्या मैं मान लूं इसने तुमसे चुदवाई नहीं होगी?”
“और क्या मैं तुम्हें नहीं जानती यश? अब मुझे ये बताओ, कितनी बार चोदा तुमने कौशल्या को। अब छुपाना मत, चोदा तो तुमने है कौशल्या को, अब तो ये बताओ कितनी बार चोदा?
जीजा जी की तो जैसे बोलती बंद थी। जब जीजी ने दुबारा ये पूछा तो जीजा जी धीरे से बोले, “चार बार।” उधर मैं जीजी से नजर ही नहीं मिला पा रही थी।
“जीजी बोली, वाह क्या बात है – चार बार। पूरी सुहागरात ही मना ली तुम दोनों ने तो।”
“फिर जीजी ने मुझसे पूछा, “और अब तू बता कौशल्या, तू तो बहुत देर से यश का लंड अपनी फुद्दी में लेने के लिए मरी जा रही थी – अब मुझे तो बस ये बता कहां कहां लिया अपने जीजा का लंड?”
“मेरी भी आवाज नहीं निकल रही थी। मैं समझ गयी अब ना तो चुप रहने का कोई फायदा है ना कुछ छुपाने का। मैंने भी धीरे से कहा, “जीजी सच बोलूं आगे-पीछे मुंह में सब जगह लिया।”
जीजी फिर जीजा जी से बोली, “यश तुम तो गांड चोदते ही नहीं, और ये?”
जीजा जी अब थोड़ा नार्मल होने लगी थी। जीजी को नार्मल होता देख जीजा जी बोले, “यार सुधा, मैं तो कौशल्या की फुद्दी ही चोदना चाहता था, मगर कौशल्या ने ही मुझे गांड चोदने के लिए कहा, और कौशल्या के मुलायम चूतड़ देख कर मैं खुद को रोक नहीं पाया। लेकिन एक बात बताऊं सुधा, कौशल्या की गांड चोदने का मजा बहुत आया।”
“इसके बाद जीजी तो जैसे गुस्से में फट पड़ी।”
“जीजी बोली, “यश मादरचोद तेरी मां की चूत साले, कौशल्या की फुद्दी में चार चाँद लगे हैं जो मेरी फुद्दी में नहीं है? और साले क्या कहा, मुलायम चूतड़ देख कर मैं खुद को रोक नहीं पाया मादरचोद, और गांड चोदने का मजा बहुत आया? अगर इतना ही मजा लेना था गांड चुदाई का तो क्या मैं मर गयी थी? मुझे बोलता, मेरी गांड में भी तो डाल सकता था? अब मैं दिखाती हूं तुम्हें सालियों की फुद्दी और गांड चोदने का मजा।”
“जीजी को इतना गुस्से में मैंने कभी भी नहीं देखा था। जीजी का ये रूप देख कर मैं और जीजा जी चुप हो गए।”
“कुछ देर बाद जीजी का गुस्सा उतरा और जीजी नार्मल हो गयी और मुझसे पुछा, “अब तू ये बता कौशल्या, मजा आया जीजा का लंड आगे-पीछे मुंह में लेकर?”
जीजी को नार्मल होते देख मेरी जान में जान आयी और मैंने धीमी आवाज में कहा, “जीजी मजा तो आया।”
“जीजी कुछ देर सोचती रही और फिर जीजी जो बोली, उससे सबकी झिझक दूर हो गयी।
“जीजी बोली, “अब जो तुम लोगों ने कर लिया सो कर लिया, अब इस तरह मुंह लटका कर मत बैठो।”
“फिर जीजी बोली, “ये तो एक ना एक दिन होना ही था। जीजा साली की चुदाई ज्यादा दिनों तक नहीं टलती। तुम्हारी और कौशल्या की चुदाई भी ज्यादा दिनों तक नहीं टलनी थी।”
“जीजी कुछ देर चुप रही फिर जीजा जी से बोली, “यश मस्त चुदाई का मस्त मजा लेना है?”
“जीजा जी की अभी भी फटी ही पड़ी थी। बड़ी मुश्किल से जीजा जी के मुंह से आवाज निकली। जीजा जी बोले, “चुदाई का मस्त मजा? कैसे सुधा, मैं समझा नहीं।”
“जीजी बोली, “मस्त मजा – बीवी और साली को इकट्ठे चोद कर, एक-दूसरे के सामने। बोलो लेना है मस्त मजा?”
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