भाई-बहन सेक्स कहानी अब आगे-
यह कहानी शुरू होती है मेरी ज़िंदगी के उस मोड़ से, जब मेरा पहला रिश्ता टूटा… और वो भी बहुत बुरी तरह से। उस वक्त मैं मुंबई में अपने बॉयफ्रेंड के साथ रहती थी, लेकिन मेरा असली घर लखनऊ में है। मेरी और मेरे बाॅयफ्रेंड की मुलाकात ऑनलाइन हुई थी, और धीरे-धीरे मैं उससे इतना जुड़ गई कि मैंने उसके साथ अपनी पूरी ज़िंदगी देखने का सपना देख लिया।
जब मुझे लगा कि अब शादी के बारे में सोचना चाहिए, तो मैंने हिम्मत करके ये बात अपने मम्मी-पापा को बताई। लेकिन वो इसके खिलाफ थे… उन्हें लव मैरिज बिल्कुल पसंद नहीं थी। मैंने उनकी बात नहीं मानी और मुंबई में एक छोटी सी नौकरी शुरू कर दी, ताकि मैं अपने पैरों पर खड़ी हो सकूँ… और अपने बाॅयफ्रेंड के साथ रह सकूँ।
उस समय सब लोग मेरे खिलाफ थे… लेकिन एक इंसान था जो हमेशा मेरे साथ खड़ा रहा — मेरा छोटा भाई। बचपन से ही वो मुझे समझता था, मेरा ख्याल रखता था। हम दोनों साथ में खेलते थे, हँसते थे। बचपन में तो मैं खेल-खेल में खुद को उसकी पत्नी भी बना लेती थी। वो बस हँस देता था, लेकिन उसके साथ हमेशा एक अजीब सा सुकून महसूस होता था।
जैसे-जैसे हम बड़े हुए, वो यादें कहीं पीछे छूट गईं… लेकिन कभी-कभी मैं सोचती थी कि वो कितना अच्छा इंसान है। मन में ये ख्याल भी आता था कि काश, मुझे जिंदगी में कोई ऐसा मिले जो उसकी तरह समझदार और अच्छा हो।
लेकिन फिर वो दिन आया… जब सब कुछ टूट गया। मेरा ब्रेकअप हो गया। जिस इंसान के लिए मैंने अपने घरवालों से लड़ाई की, अपने शहर को छोड़ा… वही मुझे बीच रास्ते में छोड़ कर चला गया।
मैं उस वक्त सड़क के किनारे खड़ी थी, मेरे पास मेरे बड़े-बड़े बैग रखे थे। हाथ हल्का-सा कांप रहा था और आंखों से लगातार आंसू बह रहे थे। सब कुछ जैसे अचानक खत्म हो गया था, और मुझे समझ ही नहीं आ रहा था कि अब आगे क्या करना था। लोग आते-जाते मुझे देख रहे थे, लेकिन उस समय मुझे किसी की परवाह नहीं थी। मेरे दिमाग में बस वही सवाल घूम रहा था—अब मैं कहां जाऊं? किसके पास जाऊं? क्या करूं?
करीब आधे घंटे तक मैं वहीं खड़ी रोती रही। हर मिनट जैसे और भारी होता जा रहा था। आखिरकार, मैंने गहरी सांस ली और अपने आंसू पोंछे। कांपते हुए हाथों से मैंने अपना फोन निकाला। कुछ सेकंड तक मैं स्क्रीन को देखती रही… फिर मैंने अपने छोटे भाई का नंबर डायल कर दिया।
फोन की घंटी बजती रही, और हर रिंग के साथ मेरा दिल और तेज धड़कने लगा। कुछ ही पल में उसने कॉल उठा ली।
“हेलो…” उसने आम आवाज़ में कहा, फिर तुरंत ही हल्की हंसी के साथ बोला, ” दीदी, क्या कर रही हो?”
उसकी आवाज़ सुनते ही मैं खुद को संभाल नहीं पाई। मेरे होंठ कांपने लगे और आंसू फिर से तेजी से बहने लगे। मैं कुछ सेकंड तक कुछ बोल ही नहीं पाई, बस रोती रही।
वो तुरंत समझ गया कि कुछ गड़बड़ थी। उसकी आवाज़ अचानक गंभीर हो गई “दीदी… क्या हुआ? आप रो क्यों रही हो?”
मैंने जैसे-तैसे खुद को संभालने की कोशिश की, लेकिन शब्द गले में अटक रहे थे।
“गोलू…” मैंने टूटती हुई आवाज़ में कहा, “मैं… मैं बस स्टॉप के पास हूँ… क्या तुम यहाँ आ सकते हो… प्लीज़?”
कुछ सेकंड के लिए फोन के उस तरफ सन्नाटा छा गया, जैसे वो मेरी हालत समझने की कोशिश कर रहा हो। फिर उसकी आवाज़ आई “आप वहीं रुको, दीदी… मैं अभी आता हूँ।”
कॉल कटने के बाद मैं वहीं खड़ी रह गई, लेकिन इस बार मेरे अंदर थोड़ा साहस भी था। मैं जानती थी—वो आएगा। हमेशा की तरह।
असल में, मैं पहली बार इतनी हिम्मत करके मुंबई आई ही उसके भरोसे थी। गोलू पहले से ही मुंबई में था—उसने मुंबई यूनिवर्सिटी से अपनी इंजीनियरिंग पूरी की थी, और अब यहीं काम कर रहा था। जब मैंने पहली बार कहा था कि मैं भी मुंबई आकर अपने बॉयफ्रेंड के साथ रहना चाहती हूँ, तब घर में बहुत विरोध हुआ था। माँ-पापा बिल्कुल खिलाफ थे… लेकिन उस वक्त गोलू ही था जिसने मुझे समझाया, मुझे हिम्मत दी, और मेरे फैसले के साथ खड़ा रहा।
वो सिर्फ मेरा भाई नहीं था… वो मेरा सबसे अच्छा दोस्त भी था। मैंने उसे अपने बॉयफ्रेंड से भी मिलवाया था। लेकिन सच कहूँ तो… उसे मेरा बॉयफ्रेंड कभी पसंद नहीं आया। वो हमेशा कहता था कि मैं उससे बेहतर डिज़र्व करती हूँ—कोई ऐसा जो मुझे सच में समझ सके।
जब भी मेरी और मेरे बॉयफ्रेंड की लड़ाई होती थी, मैं सीधे गोलू के पास चली जाती थी। वो बिना कुछ पूछे मुझे अपने पास बैठा लेता, मुझे गले लगाता… और धीरे-धीरे मेरी पीठ सहलाता रहता। उस पल में, मुझे अजीब सा सुकून मिलता था… जैसे सारी टेंशन धीरे-धीरे खत्म हो रही हो। और आज… एक बार फिर, मुझे उसी की ज़रूरत थी।
आधे घंटे बाद एक कैब धीरे-धीरे मेरे सामने आकर रुकी और सड़क के किनारे ठहर गई। मेरी आँखें अभी भी नम थी, और मेरा दिमाग पूरी तरह खाली था, समझ नहीं आ रहा था कि अब मुझे क्या करना चाहिए। तभी कैब का दरवाज़ा खुला और गोलू बाहर उतरा। जैसे ही उसकी नज़र मुझ पर पड़ी, वो बिना एक पल गंवाए मेरी तरफ तेज़ी से बढ़ा।
वो इतनी तेजी से मेरी तरफ आया कि ऐसा लग रहा था जैसे दौड़ रहा हो। मैं कुछ कह भी नहीं पाई थी कि उसने मेरे पास आकर मुझे कस कर गले लगा लिया।
उसने मुझे इतनी ज़ोर से पकड़ रखा था कि उसका सीना मेरे शरीर से पूरी तरह चिपक गया था, और उसके दबाव से मेरे स्तन भी उसके सीने के नीचे दब गए थे। उस पल मुझे उसकी पकड़ की ताकत उतनी महसूस नहीं हो रही थी, क्योंकि मेरे स्तन पहले से ही भरे और भारी थे।
मेरे और मेरे बॉयफ्रेंड का लगभग चार साल लंबा रिश्ता रहा था। इस दौरान उसे मेरे स्तन बहुत पसंद हो गए थे, और वह अक्सर उन्हें अपने प्यार जताने का एक तरीका बना लेता था। कभी वह मुझे पीछे से पकड़ कर हल्के-हल्के दबाता, कभी मेरे करीब आकर उन्हें अपने हाथों में लेकर धीरे-धीरे सहलाता। कई बार वह मज़ाक में उन्हें पकड़ कर छेड़ता, जैसे उन्हें लेकर खेल रहा हो, और मैं बस उसकी तरफ देख कर मुस्कुरा देती। कभी-कभी वह मुझे अपनी तरफ खींच कर मेरे स्तनों को अपने सीने से दबा लेता और कहता कि उसे यह एहसास बहुत अच्छा लगता था।
जब हम दोनों सेक्स करते थे, तो वह हमेशा मेरे स्तनों को बहुत जोर से दबाता था, इतना कि वे लाल हो जाते थे। और कभी-कभी जब मेरे पास उसके साथ सेक्स करने की ताकत नहीं होती थी। तब भी वह मुझे नंगी कर देता था और मेरे स्तनों को ऐसे चूसता था जैसे कोई छोटा बच्चा दूध पीने की कोशिश करता है। उस समय मैं बस बैठी रहती थी और उसे देखती रहती थी, जबकि वह मेरे स्तनों को चूसता रहता था।
इसी वजह से जब गोलू ने मुझे इतनी जोर से गले लगाया, तो मुझे साफ महसूस हुआ कि मेरे बड़े स्तन उसके सीने पर दब कर फैल रहे थे, जैसे कोई पानी से भरा गुब्बारा दबाने पर हल्का उछलता और फैलता है।
तभी उसने मेरे कान के पास झुक कर धीरे से फुसफुसाया, “क्या आप ठीक हो सिमरन दीदी?”
फिर उसने धीरे-धीरे मुझे अपने गले से अलग किया और मेरे चेहरे की तरफ देखा। उसी पल मुझे अपने बदन का एहसास हुआ, जैसे मेरे स्तन धीरे-धीरे वापस अपने शेप में आ रहे हों, टी-शर्ट के अंदर फिर से फैलते हुए, और उनके निप्पल साफ उभरे हुए महसूस हो रहे थे।
उसने मेरी बात सुनते ही थोड़ा रुक कर मेरी आँखों में देखा और फिर हल्की चिंता के साथ पूछा, “फिर फोन पर क्यों रो रही थी?”
मैंने नजरें थोड़ा नीचे करते हुए धीरे से कहा, “क्या हम ये बात घर पर जाकर कर सकते हैं?”
उसने बिना कुछ बोले हल्का सा सिर हिलाया, जैसे हाँ कह रहा हो। फिर हम दोनों वापस उसी कैब में बैठ गए और उसके अपार्टमेंट की तरफ निकल पड़े। कैब सड़क पर धीरे-धीरे आगे बढ़ रही थी। मैं चुप थी, और वह मेरे पास बैठा हुआ धीरे-धीरे मेरी पीठ सहला रहा था, मुझे शांत करने के लिए।
लेकिन जैसे-जैसे कैब स्पीड पकड़ती, हल्के झटकों के साथ मेरे स्तनों में भी हल्की हरकत महसूस हो रही थी। मैंने ध्यान दिया कि उसकी नज़र एक-दो बार मेरी तरफ गई, लेकिन उसने तुरंत खुद को संभाल लिया और ऐसे दिखाया जैसे उसने कुछ महसूस ही नहीं किया हो। वह बस चुप-चाप मेरी पीठ सहलाता रहा, जैसे उसका पूरा ध्यान मुझे संभालने में ही हो।
थोड़ी देर बाद हम उसके अपार्टमेंट पहुँच गए। जैसे ही हम अंदर गए, मैं चुप-चाप जाकर बेड पर बैठ गई। कमरा वही था—एक छोटा सा वन-बेडरूम अपार्टमेंट, जहाँ मैं पहले भी कुछ बार आ चुकी थी, जब मैं अपने रिश्ते में थी।
गोलू बिना कुछ बोले किचन की तरफ चला गया और मेरे लिए चाय बनाने लगा। मैं बेड पर बैठी हुई चारों तरफ देख रही थी। सब कुछ पहले जैसा ही था, लेकिन मेरी हालत अब बिल्कुल अलग थी। पहले जब मैं यहाँ आती थी, तब मेरे साथ कोई था… लेकिन आज मैं बिल्कुल अकेली थी।
थोड़ी देर बाद वह चाय का कप लेकर मेरे पास आया, उसने कप मेरे हाथ में दिया और मेरे बिल्कुल पास बैठ गया। मैंने धीरे से चाय की एक घूंट ली। वो लगातार मेरी तरफ देख रहा था—या तो मेरे चेहरे को देख रहा था, या फिर नीचे मेरे स्तनों की तरफ। ऐसा लग रहा था जैसे वह समझने की कोशिश कर रहा हो कि मेरे स्तन इतने बड़े कैसे हो गए थे।
फिर उसने धीरे से, बहुत शांत आवाज़ में कहा, “क्या हुआ सिमरन दीदी… अब बता सकती हो?”
मैंने उसका चेहरा देखा, और धीरे से बोली, “मेरा मेरे बॉयफ्रेंड के साथ ब्रेकअप हो गया।”
उसने यह सुनते ही थोड़ा हैरानी से मेरी तरफ देखा और तुरंत पूछा, “लेकिन क्यों?
मैंने उसकी तरफ देखा, फिर नज़रें थोड़ा झुका ली और धीरे से कहा, “ये थोड़ा पर्सनल है गोलू… मैं तुम्हें नहीं बता सकती।”
उसने मेरी बात सुन कर थोड़ा और करीब आकर धीरे से कहा, ” दीदी… मुझे बता सकती हो, मैं तुम्हारा गोलू हूँ।”
मैंने उसका चेहरा देखा और सोचने लगी कि क्या मुझे उसे अपनी पर्सनल बातें बताने का हक है या नहीं। लेकिन फिर मुझे लगा कि वो गलत भी नहीं था, क्योंकि वो मेरा गोलू था… मेरा पहला दोस्त।
जब वो कॉलेज में था, तब उसे किस्स करना भी नहीं आता था, और मैंने ही उसे सिखाया था कि किसी लड़की को कैसे किस्स करते हैं। उस समय हम कमरे का दरवाज़ा बंद कर लेते थे और रोज़ एक-दूसरे को चूमते रहते थे, जब तक उसे ठीक से समझ नहीं आ गया।
एक बार जब घर में कोई नहीं था, तब हम दोनों ने साथ में पोर्न भी देखा था। उस समय हम दोनों ही छोटे थे और सेक्स के बारे में सब कुछ समझने की कोशिश कर रहे थे।
और एक बार जब हम ऐसे ही खेलते हुए लड़कियों के बारे में बात कर रहे थे, तो उसने कहा था कि वो किसी लड़की के स्तन देखना चाहता था। तब मैंने सोचा और उसे अपने स्तन दिखा दिए थे। उस समय मेरे स्तन इतने बड़े और सॉफ्ट नहीं थे, लेकिन हम दोनों एक-दूसरे के बहुत करीब थे।
मैंने चाय का कप साइड में रख दिया, उसकी आँखों में देखा और धीरे से कहा, “ठीक है गोलू… मैं तुम्हें सब बताऊँगी… लेकिन तुम मेरे छोटे भाई हो, पहले ये वादा करो कि इसके बाद तुम अपनी दीदी को जज नहीं करोगे।”
उसने मेरी बात सुन कर बिना एक पल रुके मेरी आँखों में देखा और धीरे से कहा, “मैं वादा करता हूँ दीदी।”
मैंने एक लंबी गहरी सांस ली और कहा, “जैसा कि तुम जानते हो, मैं अपने बॉयफ्रेंड से ऑनलाइन मिली थी, और उसके बाद मैं अचानक उसके साथ उसके अपार्टमेंट में रहने चली गई। जब मैं उसके साथ रह रही थी, तब हम कई तरह से सेक्स करते थे, और सच में शुरुआत में यह मुझे अच्छा लगता था। जैसे वह मेरे बूब्स को दबाता था और चूमता था, और कभी-कभी अपना लंड मेरे बूब्स के बीच रखता था। कभी वह मेरी चूत को भी छूता और प्यार करता था।
एक बार हमने पीछे से भी किया, उस समय मुझे दर्द हुआ क्योंकि उसका लंड बड़ा था और मेरा पिछवाड़ा छोटा था।”
मैं थोड़ी देर रुकी, फिर धीरे से बोली, “लेकिन एक चीज थी जो मैं नहीं चाहती थी… और वो था कि वह अपना लंड मेरे मुंह में डाले। वह हमेशा इसके बारे में सोचता था। कभी-कभी वह मेरे चेहरे पर भी सफेद पानी छोड़ देता था, और मैं तब भी चुप रहती थी, लेकिन मैं सच में यह नहीं करना चाहती थी। मैं हमेशा मना कर देती थी।”
मेरी आवाज़ थोड़ी कांपने लगी, “लेकिन आखिर में उसने जबरदस्ती करने की कोशिश की और अपना लंड मेरे मुंह में डालने लगा… तब मैं रोने लगी। उसने कहा, अगर तुम ऐसा नहीं करोगी तो मैं तुम्हारे साथ नहीं रहना चाहता।”
मैंने उसकी आँखों में देखा और धीरे से कहा, “बस… फिर मैंने अपना बैग उठाया… और वहाँ से बाहर आ गई।”
मैं बोलते-बोलते रुक गई और गोलू के चेहरे की तरफ देखने लगी। उसका चेहरा थोड़ा गुस्से जैसा लग रहा था। मैं चुप हो गई तो मुझे लगा कि शायद मैं थोड़ा ज्यादा बोल गई। जो शब्द मैंने बोले थे, जैसे लंड, बूब्स, चूत… वो थोड़े भद्दे लग रहे थे। लेकिन उस समय मैं अपने ब्रेकअप की वजह से बहुत परेशान थी और मुझे समझ ही नहीं आ रहा था कि मैं उसे क्या बोलूं।
उसने मेरी तरफ देखा, फिर धीरे से बोला, “दीदी… अब मत रो… वो कमीना तुम्हारे लायक नहीं है।” उसने मेरा गाल हल्के से छुआ और बोला, “तुम्हें थोड़ी नींद की जरूरत है।”
मैं चुप-चाप बिस्तर पर लेट गई और आँखें बंद कर लीं। वो अपने कंप्यूटर पर काम करने लगा। कुछ घंटों बाद शायद उसका काम खत्म हुआ और वो भी आकर मेरे पास ही लेट गया।
मेरा चेहरा दूसरी तरफ था और मेरी पीठ उसकी तरफ थी। हम शुरू से ही एक ही बिस्तर पर सोते आए थे, इसलिए मेरे लिए ये कुछ अजीब नहीं था। उसने धीरे से अपना हाथ मेरी कमर पर रखा और सोने की कोशिश करने लगा। मैंने आँखें बंद रखी हुई थीं… मेरे पास ना कुछ कहने की हिम्मत थी, ना कुछ करने की। मैं बस चुप-चाप पड़ी रही… जैसे सो रही हूँ, लेकिन अंदर से मैं बिल्कुल भी सो नहीं पा रही थी।
रात के करीब दो बजे होंगे… नींद में उसका हाथ धीरे-धीरे नीचे की तरफ जाने लगा। उसका पैर मेरे पैर पर आ गया था, और उसका हाथ धीरे-धीरे मेरे बड़े पिछवाड़े की तरफ आ गया। मैं साफ महसूस कर पा रही थी कि उसकी लंबी उंगलियां कपड़ों के ऊपर से मेरे पिछवाड़े को पकड़ने की कोशिश कर रही थी। मैं उसके हाथ की गर्माहट अपनी गांड पर साफ महसूस कर रही थी… लेकिन फिर भी मैं चुप रही… आँखें बंद किए… जैसे कुछ हुआ ही नहीं।
मैं धीरे से उसकी तरफ मुड़ी… लेकिन वो गहरी नींद में था। मुझे लगा शायद ये गलती से हो रहा है… थोड़ा ज्यादा हो गया था लेकिन जान-बूझ कर नहीं। पहले भी मेरे साथ ऐसा हो चुका था… जब वो सेकंड ईयर में था और उसकी एक गर्लफ्रेंड थी… वो लोग कभी-कभी सेक्स करते थे… उस समय गोलू थोड़ा ज्यादा आदत वाला हो गया था।
एक दिन हम रात में बात करते-करते सो गए… और धीरे-धीरे उसका हाथ मेरे शॉर्ट्स के अंदर चला गया। पहले उसने मेरी पैंटी को छुआ, फिर मेरी चूत को। तब मुझे समझ नहीं आया कैसे रिएक्ट करूं? क्या बोलूं? तो मैंने उसे जगा कर थप्पड़ मार दिया। वो बस मेरा चेहरा देखता रहा… समझ नहीं पा रहा था कि मैंने क्यों मारा।
उस समय मुझे समझ आया कि वो नींद में ऐसा कर देता था। क्योंकि वो अपनी गर्लफ्रेंड के साथ भी ऐसे ही सोता था।लेकिन अजीब बात ये थी कि उस समय जब उसने मुझे छुआ था, मुझे वो अच्छा लगा था। उसकी लंबी उंगलियां बहुत नरम और गर्म थी, और उससे मुझे अलग सा एहसास हुआ था।
मैंने धीरे से उसके पास झुक कर बहुत हल्की आवाज़ में कहा, “गोलू… तुम जाग रहे हो क्या?”
लेकिन वो गहरी नींद में ही था… उसने कोई जवाब नहीं दिया।
मैंने उससे सवाल पूछना बंद कर दिया… और फिर से आँखें बंद करके सोने की कोशिश करने लगी… लेकिन मुझे नींद नहीं आ रही थी।
करीब दो घंटे बाद… मुझे फिर से उसका हाथ महसूस हुआ… इस बार उसका हाथ ऊपर की तरफ आ गया था। मैंने आँखें नहीं खोली… मुझे लगा शायद थोड़ी देर में उसका हाथ खुद रुक जाएगा। लेकिन जब मैंने कोई रिएक्शन नहीं दिया, तो उसका हाथ धीरे-धीरे हिलने लगा। उसकी उंगलियां कपड़ों के ऊपर से मेरे बूब्स को हल्के-हल्के छूने लगी फिर धीरे-धीरे वो उन्हें दबाने लगा… बहुत धीरे।
कुछ देर बाद मुझे महसूस हुआ कि उसने मेरी टीशर्ट का पहला बटन खोल दिया… उसका हाथ धीरे से अंदर आया… अब उसका हाथ सीधे मेरे बूब्स पर था। उसकी उंगलियां सीधा मेरे बूब्स को पकड़ रही थी। फिर उसने अपनी दो उंगलियों से मेरे निप्पल को पकड़ लिया और हल्का-हल्का दबाने लगा।
मैं आँखें खोलना चाहती थी और उसे रोकना चाहती थी लेकिन मुझे डर लग रहा था। अगर उसे पता चल गया कि मैं शुरू से जाग रही थी तो क्या होगा। जब वो मेरे बूब्स दबा रहा था और मेरे निप्पल को दबा रहा था, मुझे बहुत अजीब लग रहा था… समझ नहीं आ रहा था क्या करूं। मैं बस वैसे ही पड़ी रही। कुछ नहीं बोली। मुझे लग रहा था कि अब वो सो नहीं रहा है फिर भी मैंने कुछ नहीं किया। बस ऐसे ही लेटी रही… जैसे मैं सो रही हूँ।
कुछ मिनट बाद… जब वो रुक गया… उसने धीरे से मेरा टी-शर्ट वापस ठीक किया और बटन बंद कर दिया। फिर वापस उसी तरह लेट गया। मैंने धीरे से आँखें खोलीं… उसकी तरफ देखा… उसकी आँखें बंद थीं… और उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान थी। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि वो अपनी दीदी के साथ ऐसा क्यों कर रहा था? और उसे इससे क्या मिल रहा था? मैं बस लेटी रही… और सोचने लगी कि अब मुझे क्या करना चाहिए? क्योंकि मैं घर नहीं जा सकती थी और जिस इंसान पर मुझे भरोसा था, वही मेरे पास लेटा था। वही जिसने अभी थोड़ी देर पहले मेरे बूब्स दबाए थे।
अगला भाग पढ़े:- सिमरन दीदी और उसका छोटा भाई-2