पिछला भाग पढ़े:- ट्रेन में मिली 2 अंजान बहनों की चुदास-3
हिंदी सेक्स कहानी अब आगे-
अनीता दीदी और रिया पहले से ही बाहर आ चुकी थी। दोनों ने ही नाइट गाउन पहना हुआ था। अनीता दीदी ब्लैक कलर की नाइट गाउन पहनी हुई थी। नाइट गाउन का कपड़ा पतला और ढीला था। उसके नीचे उनके स्तनों का आकार साफ़ दिख रहा था।
चलते समय कपड़ा हिलता जिससे कि उनका उभार और ज़्यादा साफ़ दिखाई देता। गाउन का कपड़ा शरीर से चिपका हुआ नहीं था, लेकिन फिर भी उनके शरीर की बनावट बहुत अच्छे से दिखाई दे रही थी।
वहीं दूसरी तरफ रिया ने सफ़ेद रंग का लंबी गर्दन वाला नाइट गाउन पहन रखा था। गाउन का कपड़ा उसके शरीर के साथ सलीके से गिर रहा था, और गर्दन के पास की खुली बनावट से उनके स्तनों की आभा साफ़ झलक रही थी। कपड़े के नीचे उसके स्तन उभरे हुए महसूस हो रहे थे। चलते-चलते हल्की सी हरकत के साथ उनका आकार नज़र आता, जैसे कपड़ा खुद उनकी मौजूदगी का एहसास करा रहा हो।
मैं कुछ सेकंड तक कुछ बोल ही नहीं पाया। रात का सन्नाटा और उन दोनों का इस तरह मेरे सामने होना मुझे अंदर ही अंदर से उत्तेजित कर रहा था। पर मैंने खुद को संभालते हुए देखा कि डाइनिंग टेबल पर खाना लगा हुआ था।
मैंने पूछा: घर के और सब लोग कहां गये?
अनीता दीदी: बहुत रात हो गई है ना, इसलिए मैंने सब को बोल दिया हम खाना खा कर सो जायेंगे, वो चिंता ना करे। इसलिए वो सब सोने चले गए। तुम आओ अपन तीनों खाना खा लेते है।
मैंने कहा “ठीक है अनीता दीदी” और खाना खाने बैठ गया। अनीता दीदी मेरे सामने वाली कुर्सी पर बैठ गई और रिया मेरे पास की कुर्सी पर ही बैठ गई। उसने पहले ही कुर्सी बिल्कुल पास-पास कर ली थी।
हमने खाना शुरू किया। कुछ देर बाद मुझे महसूस हुआ जैसे कि कोई मेरे लोअर के ऊपर से मेरे लंड को सहला रहा हो। मैंने देखा तो पता पड़ा कि रिया मेरे लोअर के ऊपर से मेरे लंड को शहला रही थी। मैंने इग्नोर किया और खाना खाने लगा। कुछ ही देर में मुझे महसूस हुआ कि रिया ने अपना हाथ अब मेरे लोअर के अंदर डाल दिया और वो मैंने लंड को पकड़ के हिला रही थी।
पर मैं सब इग्नोर करते हुए खाना खा रहा था। तभी मुझे एक और चीज महसूस हुई कि किसी का पैर मेरे पैर पर था। वो पैर और किसी का नहीं, अनिता दीदी का था। वो अपने पैर को मेरे पैर से लेके मेरी जांघ तक ले जाते हुए सहला रही थी। जब तक हमने खाना खाया ऐसा ही चलता रहा।
खाना होने के बाद रिया और अनिता दीदी उठी और उन्होंने सब सामान हटाया और थोड़ी साफ सफाई करने लगी। पर मैं पनी कुर्सी पर ही बैठा रहा, क्योंकि रिया ने मेरे लंड को हिला-हिला के पूरा खड़ा के दिया था।
कुछ ही देर में सब कम करने के बाद अनिता दीदी ने रिया से कहा: तेरे रूम के पास वाला जो गेस्ट रूम है, जिसमें केतन रहने वाला है। वहां एक बार जा कर देख ले, वहां पानी रखा है या नहीं।
रिया बोली: ठीक है दीदी देख लेती हूं।
इतना बोल कर वो चली गई। पर मैं अभी भी कुर्सी पर ही बैठा था। लेकिन रिया के जाते ही अनिता दीदी मेरा हाथ पकड़ कर मुझे खींचते हुए उनके बेडरूम में ले गई (उनका बेडरूम डाइनिंग टेबल से थोड़ी ही दूर था।)।
बेडरूम में ले जाते ही अनिता दीदी ने मुझे बाहों में भर लिया और कस कर चूमते हुए बोली: केतन, आज तुमने मेरी प्यासी चूत की आग बुझा दी।
मैं वो पल कभी नहीं भूलूंगी। मैंने अनिता दीदी को किस्स किया।
अनिता दीदी: लेकिन उस हालत में मेरी प्यास बुझाने वाला तुम्हारा लंबा मोटा लंड तो मैंने अभी तक देखा ही नहीं। प्लीज मुझे दिखाओ ना अपना लंड। इतना बोल कर उसने मुझे अपनी बाहों से आजाद किया और नीचे देखा तो मेरा लंड पूरा खड़ा हुआ लोअर में साफ दिख रहा था (उसको लगा उसकी वजह से हुआ था। उसको नहीं पता था कि रिया ने हिला-हिला कर खड़ा किया था।)
वो हंसते हुए बोली: मेरी वजह से फिर से तुम्हारा खड़ा हो गया।
इतना बोलते हुए उसने मेरा लोअर नीचे खींचा और मेरा लंड बाहर निकाला। मेरा लंड जैसे ही बाहर आया उसने अपने दोनों हाथों से पकड़ लिया और सहलाने लगी। उसके कोमल हाथों में आ कर लंड और फड़फड़ाने लगा।
अनिता दीदी उसको अपने दोनों हाथों से सहलाते हुए अपने गुलाबी होठों से चूमने लगी। मेरा लंड पूरा खड़ा था, बिल्कुल लोहे जैसा कड़क हो गया था।
अनिता दीदी लोडे को सहलाते हुए बोली: अरे बाप रे, इतना लंबा और मोटा लंड पहली बार देख रही हूं केतन। मुझे तो यकीन नहीं हो रहा है कि इतना बड़ा मेरी चूत में कैसे चला गया। इसलिये अभी तक मेरी चूत में इतना दर्द हो रहा है कि मैं सही से चल भी नहीं पा रही।
इतना बोलते हुए उन्होंने अपने होंठ मेरे सख्त लंड पर रख दिए। उन्होंने जोर से उसे चूमना शुरू कर दिया। वह मेरे लंड को चूमे जा रही थी। जैसे ही उनके होंठ मेरे लंड पर टिके, मेरे भीतर एक हल्की सी कंपकंपी दौड़ गई। मुझे उनके होंठों की नरमी साफ़ महसूस हो रही थी। यह एक नरम, शांत सा एहसास था।
पहले तो अनिता दीदी मेरे लंड को होंठों से सिर्फ चूमती रही। उपर से लेकर नीचे तक हर जगह यहां तक मेरे टेस्टीकल को भी उन्होंने अपने मुलायम होंठों से चूमा। उनके होंठों का छूना हर बार मेरे अंदर गर्मी बढ़ा रहा था।
फिर उन्होंने अपनी जीभ से हल्की-हल्की हरकतें शुरू की। जैसे हर स्पर्श से मेरी सांसें और तेज़ होती जा रही हो। उसी पल उन्होंने अपने होंठों को हल्के से खोल कर मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर आने दिया और उनका सिर बहुत धीरे हिलने लगा। आगे, फिर पीछे, पहले तो मुझे उनके मुंह का गीलापन महसूस हुआ।
कुछ ही पलों में उनकी लय बदलने लगी। जो हरकतें अभी तक ठहरी हुई थी, उनमें अचानक तेज़ी आ गई। उनका सिर पहले से कहीं ज़्यादा तेज़ी से आगे-पीछे होने लगा, जैसे उन्होंने एक साफ़ रफ्तार पकड़ ली हो।
अब मुझे अपने लंड के चारों तरफ़ उनके मुँह की गर्माहट साफ़ महसूस होने लगी। यह कोई तेज़ झटका नहीं था, बस एक लगातार, सुकून देने वाली गर्मी थी जो धीरे-धीरे पूरे शरीर तक फैल रही थी। सांस अपने आप भारी होने लगी और ध्यान उसी एहसास पर टिक गया।
उनका मुँह मुलायम लगा, जैसे हर हरकत में संभाल और ध्यान हो। होंठों की पकड़ हल्की सी बदली, कभी थोड़ी ढीली, कभी ज़रा कसती हुई, और उसी के साथ मेरे भीतर की सिहरन बढ़ती चली गई इस बीच उनकी आँखें आधी बंद थी। माथे पर हल्की सिकुड़न थी, और गालों में थोड़ा तनाव दिख रहा था। और वो बड़ी ही मस्ती में मेरे लंड को चूसे जा रही थी।
पर यह खुशी और आनंद के पल ज्यादा देर नहीं रहे। रिया की आवाज आई “दीदी केतन कहा हो आप दोनों?”
तभी दीदी ने मेरे लंड को अपने मुंह से बाहर निकाला और जल्दी से मेरे लोअर के अंदर डाल कर खड़ी हो कर रिया को आवाज दी “रुक आये हम अभी।”
उस एक पल तो लगा जैसे अनिता दीदी को सब बता दूं रिया के बारे में और अपने लंड को इसी तरह उनके मुंह में डाल कर मुंह को चोदूं। पर मैंने अपने आपको कंट्रोल किया और चुप-चाप अनिता दीदी के पीछे चलते हुए बाहर आया।
मेरा लंड पूरा खड़ा हुआ था पर मैंने कुचेंही किया क्योंकि घर में अनिता दीदी और रिया के अलावा सब सो रहे थे।
हम बाहर आये तो रिया ने कहा: मैंने देख लिए है केतन के कमरे में सब रखा हुआ है।
अनिता दीदी बोली: ठीक है जा तू भी सो जा अब जा के।
रिया: ठीक है दीदी।
इतना बोलते हुए रिया अपने रूम में चली गई। रिया के जाते ही अनिता दीदी एक-दम से मेरे पास आई मेरे लंड को लोअर के उपर से ही छूते हुए मुझे लिप किस्स किया। मैंने भी उसको जोर से बाहों में भर कर लिप किस्स किया उम्म्हहाआआ उम्हहाआआ उम्म्हहाआ उम्म्हहाआआ।
थोड़ी देर तक किस्स करने के बाद अनिता दीदी थोड़ी दूर हुई और फिर अनिता दीदी बोली: केतन, अब जाओ और आराम से सो जाओ। कल तुम्हें शादी में भी जाना है ना तुम्हे।
मैंने कहा: ठीक है अनिता दीदी।
इतना बोल कर मैं जाने लगा। जाते-जाते मैंने अनिता दीदी की गांड पर जोर से थप्पड़ मारा और गुड नाइट बोला।
दीदी: आह्ह्ह्ह गुड नाइट बदमाश।
बोलते हुए वो भी अपने रूम में चली गई। वो अभी भी ठीक से चल नहीं पा रही थी।
मैं भी अपने रूम में चला गया सोने के लिए।
अगले भाग में पढ़ें कि मैंने रिया के साथ कैसे मजे किये और उसको कैसे चूत चोदी और उसने मजे से चुदवाई।
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