पिछला भाग पढ़े:- दीदी ने सिखाया मुझे सेक्स करना-10
भाई-बहन सेक्स कहानी अब आगे-
अगले दिन सुबह से ही साक्षी दीदी मुझसे नज़रें चुरा रही थी। जैसे ही मेरी आँख खुली, मैंने उन्हें किचन में काम करते देखा। लेकिन उन्होंने मेरी तरफ एक बार भी ठीक से नहीं देखा। मैं उनके पास जाने की कोशिश करता, कुछ बोलने की कोशिश करता, पर वो हर बार खुद को किसी ना किसी काम में लगा लेती। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि कल रात के बाद ऐसा क्या बदल गया। उनके चेहरे पर साफ दिख रहा था कि वो मुझसे दूर रहना चाहती थी, जैसे जान-बूझ कर मुझसे बच रही हों।
नाश्ते के टाइम हम दोनों एक ही टेबल पर आमने-सामने बैठे थे। पूरा माहौल बिल्कुल शांत था। मैंने कई बार सोचा कि उनसे बात करूँ, लेकिन उनके ठंडे अंदाज़ ने मुझे रोक दिया। वो बस चुपचाप खाना खाती रही, ना मेरी तरफ देखा, ना कुछ बोला। उनका ऐसा रवैया देख कर मेरे अंदर बेचैनी बढ़ती जा रही थी, हर सेकंड मुझे अजीब सा लग रहा था।
मुझे समझ नहीं आ रहा था कि साक्षी दीदी को क्या हो गया है। सुधा दीदी के बाद वही एक लड़की थी जिनके साथ मैंने रात बिताई थी, और वो भी कुछ खास अच्छी नहीं गई थी। लेकिन अब साक्षी दीदी का ऐसे अचानक बदल जाना मेरे दिमाग में घूमता ही जा रहा था।
मैं जितना उनके करीब जाने की कोशिश करता, वो उतना ही मुझसे दूर होती जा रही थी। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूँ। आखिर मैंने सोचा कि कॉलेज जाकर सुधा दीदी से मिलूं। शायद वही मुझे समझा सकें कि ये सब क्या चल रहा था।
मैं जल्दी-जल्दी तैयार होकर कॉलेज पहुंचा और उन्हें कॉल किया। उन्होंने फोन उठाया और कहा कि वो लाइब्रेरी में थी। मैं सीधे लाइब्रेरी की तरफ गया। अंदर जाते ही मैंने चारों तरफ देखा, लेकिन वो तुरंत दिखाई नहीं दीं। थोड़ा अंदर जाने पर मैंने उन्हें देखा — वो बुक शेल्फ के बीच वाले कोने में खड़ी थी।
वो ऊपर रखी किताब लेने की कोशिश कर रही थी, हाथ ऊपर उठा हुआ था। उस वक्त उन्होंने ब्लैक जींस और ब्लू टी-शर्ट पहनी हुई थी।
उनकी टी-शर्ट उनके शरीर से चिपकी हुई थी। जिससे उनके स्तन साफ उभर कर दिख रहे थे। जैसे ही वो ऊपर स्ट्रेच कर रही थी, कपड़े हल्के से खिंच रहे थे और उनका शेप और साफ नज़र आ रहा था। उनकी हर छोटी मूवमेंट के साथ टी-शर्ट पर हल्का सा हिलना दिख रहा था। जिससे मेरी नज़र बार-बार वहीं अटक जा रही थी।
ब्लैक जींस भी काफी फिट थी, जिससे उनकी बॉडी का शेप साफ नज़र आ रहा था। जिस तरह वो खड़ी थी और हल्का सा आगे झुकी हुई थी, उनका पूरा फिगर और ज्यादा उभर कर दिख रहा था। जींस के नीचे उनका नाज़ुक हिस्सा बस हल्के से दिखाई दे रहा था। कोई साफ लाइन नहीं लेकिन इतना कि ध्यान वहीं अटक जाए।
मैं कुछ सेकंड वहीं खड़ा रह गया, मेरी नज़र उन पर से हट ही नहीं रही थी। दिमाग में पहले से चल रही बातें और ये सब मिल कर मुझे और भी बेचैन कर रही थी।
तभी उन्होंने मेरी तरफ देखा, हल्की सी मुस्कान दी और बोली, “गोलू, ये किताब नीचे निकाल दोगे?”
मैं धीरे-धीरे उनके पास गया। बुक शेल्फ के बीच की जगह बहुत कम थी। हम दोनों मुश्किल से उसमें खड़े हो पा रहे थे। जैसे ही मैं उनके बिल्कुल पास पहुँचा, हमारे बीच बस बहुत ही हल्का सा फासला बचा था। मैंने हाथ ऊपर बढ़ाया और उनके लिए किताब निकाल ली। जैसे ही मैं नीचे आया, मैं ठीक उनके सामने खड़ा था। जगह इतनी कम थी कि हमारा शरीर लगभग छू रहा था।
उनके स्तन सीधे मेरी छाती से हल्के-हल्के छू रहे थे। हर छोटी सी हरकत के साथ वो स्पर्श और साफ महसूस हो रहा था, जिससे मेरी सांसें थोड़ी भारी होने लगी। हम दोनों इतने करीब थे कि उनके चेहरे की गर्मी और सांसें साफ महसूस हो रही थी। वो भी वहीं खड़ी थी, बिना पीछे हटे, जैसे उस पल को महसूस कर रही हों।
तभी उन्होंने फिर से हल्की सी मुस्कान दी… और बिना पीछे हटे थोड़ा और मेरे करीब आ गई। अब उनके स्तन हल्के से मेरी छाती पर दब रहे थे, जैसे वो जान-बूझ कर दूरी खत्म कर रही हों। उस पल में हमारे बीच कोई फासला नहीं बचा था, बस एक-दूसरे की गर्मी महसूस हो रही थी।
वो मेरी आँखों में देखते हुए धीमे से बोली, “गोलू… तुम मुझसे कॉलेज में क्यों मिलना चाहते थे?”
मैं कुछ पल तक चुप रहा, हल्का सा घबराया हुआ… फिर धीरे से बोला, “दीदी… मैं आपसे एक सवाल पूछना चाहता था…”
उन्होंने हल्का सा सिर टेढ़ा किया, आँखों में वही मुस्कान रखते हुए बोली, “सवाल? कैसा सवाल… गोलू?”
मैं थोड़ा झिझक गया। समझ नहीं आ रहा था कैसे पूछूं… क्योंकि मैं उन्हें साक्षी दीदी के बारे में तो बता नहीं सकता था। कुछ सेकंड मैं चुप रहा, फिर धीरे से बोला,
“दीदी… मेरा एक दोस्त है… उसने कल रात एक लड़की के साथ सेक्स किया… लेकिन…” मैं रुक गया, शब्द ढूंढने लगा।
फिर थोड़ा हिचकते हुए आगे बोला, “वो लड़की… उसे और ज्यादा हार्ड और लंबा चाहिए था… लेकिन मेरा दोस्त वैसा नहीं कर पाया… जैसा वो चाहती थी…” मैंने एक पल के लिए उनकी आँखों में देखा, फिर धीरे से कहा, “और अब वो लड़की उसे इग्नोर कर रही है…”
तभी उन्होंने मेरी तरफ देखा… बस थोड़ा सा, पूरा चेहरा नहीं… और बिना कुछ कहे अपनी जींस का हुक खोल दिया। जैसे ही उनकी जींस ढीली हुई, उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया… और धीरे से उसे अपनी जींस के अंदर ले गई।
सबसे पहले मेरी उंगलियां उनकी पैंटी से टकराई। कपड़ा मुलायम था, लेकिन उसके नीचे की गर्मी साफ महसूस हो रही थी। मेरी उंगलियां हल्के से वहीं रुक गई, जैसे उस एहसास को समझने की कोशिश कर रही हों। फिर उन्होंने खुद मेरा हाथ और नीचे सरकाया… और पैंटी के अंदर ले गई।
अब मेरी उंगलियां और हथेली सीधे उनके सबसे निजी हिस्से को छू रही थी। उस स्पर्श में एक अलग ही गर्माहट थी, नरमी के साथ हल्की सी नमी, जो हर पल के साथ और साफ महसूस हो रही थी।
मेरी उंगलियां धीरे-धीरे उसकी बनावट को महसूस करने लगी… ऊपर की तरफ हल्का उभरा हुआ हिस्सा, फिर नीचे की तरफ जाती हुई नरम रेखाएं… सब कुछ बहुत ही नाजुक और अलग सा था। मेरी हथेली उसके ऊपर टिकी हुई थी, और उंगलियां हल्के-हल्के हिलते हुए उसकी पूरी शेप को समझने की कोशिश कर रही थी।
तभी उन्होंने बहुत धीरे से कहा, “गोलू… क्या तुम अपनी दो उंगलियां अंदर डाल सकते हो…”
उनकी बात सुन कर मैं एक पल के लिए रुक गया। मैं समझ नहीं पा रहा था कि वो क्या करना चाहती थी। मैं तो उनसे सवाल पूछने आया था… लेकिन वो मुझसे कुछ और ही चाह रही थी। मेरे दिमाग में उलझन थी… लेकिन उस पल में मैंने कुछ सोचा नहीं… बस वही किया जो उन्होंने कहा।
लाइब्रेरी लगभग खाली थी… चारों तरफ सन्नाटा था… और हम दोनों उस कोने में खड़े थे जहाँ कोई हमें देख नहीं रहा था। मैंने धीरे-धीरे अपनी दो उंगलियां आगे बढ़ाई… बहुत सावधानी से… और उन्हें अंदर ले गया। अंदर का एहसास अलग था… बाहर की नरमी से बिल्कुल अलग… थोड़ा और गर्म, थोड़ा और मुलायम… और हर हल्की सी हरकत के साथ वो एहसास और गहरा होता जा रहा था। मेरी उंगलियां धीरे-धीरे आगे बढ़ रही थी… जैसे हर इंच को महसूस करते हुए… और मेरी हथेली अब भी बाहर टिकी हुई थी, उनकी गर्माहट को महसूस करते हुए।
मेरी उंगलियां रुक गई… और उसी पल उन्होंने हल्की सी कराह के साथ कहा, “गोलू, तुम्हें मेरी चूत कैसी लग रही है?”
मैं समझ नहीं पा रहा था कि वो क्या करने की कोशिश कर रही थी। सब कुछ जैसे फिर से उलझ रहा था, और मुझे कुछ भी साफ समझ नहीं आ रहा था।
फिर मैंने उनका हाथ महसूस करते हुए हिम्मत करके कहा, “दीदी… आपकी चूत बहुत अच्छी है…”
उन्होंने हल्की सी मुस्कान दी और बोली, “गोलू… हर लड़की की चूत एक जैसी होती है, लेकिन हर लड़की को खुश करने का तरीका अलग होता है… अगर उन्हें पूरा मज़ा नहीं मिलता तो वो लड़कों से नाराज़ हो जाती हैं…”
मैं चुपचाप उनकी बात सुनता रहा। वो आगे बोली, “गोलू… हमारी चूत बहुत ज़्यादा महसूस करती है और हमें खुश होने के लिए लड़कों का लंड चाहिए होता है… कुछ लड़कियों को बड़ा लंड पसंद होता है, कुछ को छोटा…”
उन्होंने मेरी आँखों में देखते हुए कहा, “अगर तुम्हारे दोस्त की ताकत कम है या उसका लंड छोटा है, तो शायद वो लड़की खुश नहीं हुई… इसलिए वो उससे बात नहीं करती… क्योंकि उसे लंबा और बड़ा लंड चाहिए होगा शायद…”
मेरी उंगलियाँ अभी भी उनकी नाज़ुक हिस्से के अंदर थी। तभी उन्होंने धीरे से मेरा हाथ बाहर निकाला… और बिल्कुल आराम से अपनी जीन्स बांध ली। मैं बस उनके चेहरे को देखता रह गया। उनके चेहरे पर कोई झिझक नहीं थी… जैसे ये सब उनके लिए बिल्कुल आम हो। जैसे मेरा उनकी चूत को छूना उनके लिए कोई बड़ी बात ही नहीं थी।
उन्होंने देखा कि मैं लगातार उनके चेहरे को ही देख रहा हूँ। फिर उन्होंने हल्की सी मुस्कान के साथ कहा, “क्या हुआ… ऐसे क्या देख रहे हो?”
मैंने कहा, “दीदी… आप बाकी लोगों से इतनी अलग कैसे हो… आप मेरी बड़ी बहन हो… फिर भी आप मुझे ये सब कैसे सिखा रही हो… आप इतनी अच्छी कैसे हो…”
उन्होंने हल्की सी मुस्कान दी और कहा, “क्योंकि मेरे छोटे भाई को ये सब जानना चाहिए… मैं जानती हूँ कि मैं तुम्हारी बड़ी बहन हूँ और तुम मेरे छोटे भाई हो… शायद लोगों को ये अजीब लगे कि एक बहन अपने छोटे भाई को ये सब सिखा रही है… लेकिन मेरी नज़र में मैं बस चाहती हूँ कि मेरा भाई सब कुछ जाने… और मैं बस उसकी मदद कर रही हूँ…”
मैं चुप रहा, लेकिन मेरे मन में बहुत कुछ चल रहा था। मैं लाइब्रेरी के बाहर आ गया और सुधा दीदी को पढ़ने के लिए वहीं छोड़ दिया। जब मैं बाहर आया तो मुझे थोड़ा बुरा लगा, क्योंकि सुधा दीदी मेरी पहली मोहब्बत थी। उन्होंने हर चीज़ में मेरा साथ दिया, वो मेरे साथ रात बिताती थी, उन्होंने मेरा लंड चूसा था और पहली बार मैंने अपना लंड उनकी गांड में डाला था। वो ही एक लड़की थी जो मुझे सच में समझती थी।
लेकिन अब मैं उन्हें भूलने वाला था, सिर्फ साक्षी दीदी की वजह से। उस समय मैंने सोचा कि जब मैं साक्षी दीदी को पूरी तरह खुश कर दूंगा। तो मैं उन्हें अकेला छोड़ दूंगा और फिर अपना सारा समय सिर्फ सुधा दीदी के साथ बिताऊंगा।
पूरा दिन मैं साक्षी दीदी से बात करने के लिए सही मौका ढूंढता रहा लेकिन मुझे कोई मौका नहीं मिला। शाम को सुधा दीदी भी कॉलेज से घर आ गई तो मैंने साक्षी दीदी के पीछे जाना छोड़ दिया। लेकिन वो फीलिंग खत्म नहीं हुई।
रात को मैंने सही समय ढूंढा… करीब एक बजे साक्षी दीदी अपने कमरे से बाहर आई बाथरूम जाने के लिए… जैसे ही वो अंदर गई मैं भी धीरे-धीरे वहां चला गया। पहले मुझे लगा कि उन्होंने बाथरूम का दरवाजा लॉक किया होगा लेकिन वो लॉक नहीं था… शायद उन्हें लगा कि इस समय कोई नहीं आएगा।
जब मैंने दरवाजा खोला तो मैं लगभग सांस लेना ही भूल गया। साक्षी दीदी कमोड पर बैठी थी। उनकी पैंटी घुटनों तक नीचे थी और वो कमोड में पेशाब कर रही थी। उन्होंने अपना नाइट ड्रेस हाथों से ऊपर पकड़ा हुआ था। पेशाब की बूंदें धीरे-धीरे उनके नाज़ुक हिस्से से नीचे गिर रही थी।
उनका नाज़ुक हिस्सा साफ दिख रहा था। हल्के से खुला हुआ और उस पर से गिरती हुई बूंदें उसे और ज्यादा चमका रही थी।
हर बूंद नीचे गिरते हुए एक अलग ही अहसास दे रही थी। जैसे सब कुछ धीरे-धीरे मेरी आँखों के सामने हो रहा हो।मैं कुछ पल तक वहीं खड़ा रह गया। मेरी नजरें जमी हुई थी, लेकिन दिमाग में एक ही बात चल रही थी कि ये पल बहुत निजी था, और मुझे यहां नहीं होना चाहिए।
उन्होंने मेरी तरफ देखा लेकिन ऐसे जैसे ये उनके लिए बिल्कुल आम हो, जैसे उन्हें कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा कि मैं उन्हें इस हालत में देख रहा था। मैं बस वहीं खड़ा था और उन्हें देख रहा था। जब वो खत्म कर चुकीं तो वो खड़ी हुई और अपनी पैंटी ऊपर करने लगी। तभी अचानक मैं अंदर चला गया और उनका एक हाथ पकड़ लिया।
उन्होंने मेरी तरफ देखा। उनकी आवाज़ बिल्कुल आम थी, थोड़ी थकी हुई सी “गोलू… क्या कर रहे हो?”
मैंने कहा, “दीदी… मुझे पता है आप मुझसे नाराज़ हो, क्योंकि पिछली रात मैं आपको वैसे नहीं कर पाया जैसा आप चाहती थी। लेकिन मुझे एक और मौका चाहिए…”
उन्होंने अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश की और बोली, “गोलू… तुम कभी भी मुझे वैसे नहीं कर पाओगे जैसा मैं चाहती हूँ। चाहे मैं तुम्हें कितने भी मौके दे दूँ। मैंने तय कर लिया है… अगले हफ्ते मैं अपने पुराने बॉयफ्रेंड के पास वापस चली जाऊंगी।”
उस वक्त मैं कुछ नहीं समझ पाया क्या बोलू। क्योंकि पिछली रात उन्होंने मुझे मौका दिया था लेकिन मैं उन्हें खुश नहीं कर पाया।
मैंने बिना कुछ सोचे सीधे अपना हाथ उनके नाज़ुक हिस्से पर रख दिया। उन्होंने मुझे रोका नहीं। लेकिन उनके चेहरे पर साफ दिख रहा था कि वो अभी भी मुझसे खुश नहीं थी।
मैंने अपनी दो उंगलियाँ उनके नाज़ुक हिस्से के अंदर डाल दी… और धीरे-धीरे उन्हें हिलाने लगा। मेरी उंगलियाँ अंदर जाते ही मुझे उनकी गर्माहट महसूस हुई। लेकिन उनके चेहरे पर कोई बदलाव नहीं आया। मैंने थोड़ा और कोशिश की। अपनी उंगलियों को अंदर घुमाया। लेकिन वो फिर भी वैसे ही खड़ी रहीं जैसे उन्हें कुछ भी महसूस नहीं हो रहा हो।
तभी उन्होंने धीरे से कहा, “गोलू… मुझे पता है तुम ये सब इसलिए कर रहे हो क्योंकि तुम नहीं चाहते कि मैं अपने पुराने बॉयफ्रेंड के पास वापस जाऊं। क्योंकि वो अच्छा इंसान नहीं है।”
उन्होंने एक गहरी सांस ली और मेरा हाथ हटाते हुए कहा, “लेकिन गोलू… वो मुझे वैसे करता था जैसा मैं चाहती थी… और अब मुझे पता है कि मुझे क्या चाहिए। मुझे सिर्फ वहीं चाहिए जो मुझे पूरी तरह खुश कर सके और वो तुम नहीं हो।”
उस वक्त मैं कुछ नहीं समझ पाया क्या बोलूं। मैं बस वहीं खड़ा रह गया। मेरा चेहरा नीचे झुक गया था जैसे मैं रोने वाला हूँ। मैं कुछ भी नहीं बोल रहा था। उनकी पैंटी अभी भी उनके घुटनों पर थी। पर इस बार उन्होंने उसे ऊपर नहीं किया। बल्कि नीचे खींच कर फर्श पर फेंक दिया। फिर उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा।
उन्होंने धीरे से कहा, “गोलू… उदास मत हो… अगर तुम चाहो तो अभी तुम मुझे चोद सकते हो और अगर इस बार तुम मुझे वैसे चोद पाए जैसे मैं चाहती हूँ, तो मैं अपने पुराने बॉयफ्रेंड के पास वापस नहीं जाऊंगी।”
और यही बिल्कुल वही लाइनें थी जो मैं अपनी साक्षी दीदी के मुंह से सुनना चाहता था। वही साक्षी दीदी जो मेरे सामने खड़ी थी, वही लड़की जिसे मैं अपने बचपन की यादों से जानता था, जिसके साथ मैंने अपना बचपन बिताया था, इसलिए मैं कभी नहीं चाहता था कि कोई उसे चोट पहुँचाए। उसके ये शब्द सुन कर मेरे अंदर एक अलग ही एहसास उठ रहा था। क्योंकि वो सिर्फ कोई लड़की नहीं थी बल्कि मेरी बहन थी, और मैं नहीं चाहता था कि कोई भी उसे दुख दे।
उसकी बातें सुनने के बाद मैंने बिना कुछ सोचे अपना नाइट पैंट पकड़ा और उसे नीचे खींच दिया, और उसी के साथ अपना अंडरवियर भी उतार दिया। कल रात मैं पहले ही उसके साथ था। लेकिन उस समय मैं उसे खुश नहीं कर पाया था। ये बात मेरे दिमाग में बार-बार आ रही थी। लेकिन अब मेरे पास मौका था, और मैं खुद को तैयार कर रहा था, ताकि इस बार मैं उसे पूरी तरह खुश कर सकूँ। इस बार मैं उसे जितना हो सके उतना जोर से चोद सकूँ। क्योंकि अब मैं कोई कमी नहीं छोड़ना चाहता था।
मैं धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ा। अब हमारे बीच सिर्फ एक छोटा सा फासला रह गया था। उसकी आँखों में हल्की झिझक थी, लेकिन उसने खुद को पीछे नहीं किया। ऐसा लग रहा था जैसे हम दोनों उस पल में बंध चुके हों।
मैं आगे बढ़ने ही वाला था, बस एक पल और… सब कुछ जैसे रुक सा गया था। तभी अचानक पीछे से एक तेज आवाज आई , “तुम दोनों क्या कर रहे हो?”
मैं वहीं पर बिल्कुल स्टैच्यू की तरह रुक गया। मेरा पूरा शरीर जैसे जाम हो गया था, ना आगे बढ़ पा रहा था ना पीछे हट पा रहा था। दिल इतनी तेजी से धड़क रहा था कि जैसे छाती से बाहर आ जाएगा। धीरे-धीरे मैंने अपनी नज़र उस दिशा में घुमाई जहाँ से आवाज आई थी। मेरी सांसें अटक गई जब मैंने देखा कि बाथरूम के पास कोई खड़ा है।
धुंधली रोशनी में जैसे ही चेहरा साफ दिखा, मेरे होश उड़ गए। वो सुधा दीदी थी। वो वहीं खड़ी थी, हमें देख रही थी। उसके चेहरे पर हैरानी, गुस्सा और सवाल सब कुछ एक साथ नज़र आ रहा था।
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