पिछला भाग पढ़े:- मामा जी के साथ मेरी मस्त रंगरलियां-9
हिंदी चुदाई कहानी अब आगे-
नाती मामी मामा जी को अपनी अमर और हेमंत के साथ हुई चुदाई की कहानी सुनाई जो मामा जी अब मुझे सुना रहे थे।
“मामा जी की कहानी जारी थी, “किरण अपनी अमर और हेमंत के साथ हुई चुदाई की कहानी सुना कर नाती चुप हो गयी। कुछ देर के बाद नाती ने मुझे एक बार चूमा और बोली, “गोपाल एक बात और बोलूं, तुमसे एक बात और भी करनी थी – इसी सिलसिले में।”
“मुझे याद आ गया कि ये तो नाती ने मुझसे पहले भी कहा था। मैंने कहा, “बोलो नाती क्या बात है?”
“नाती बोली, “गोपाल ये रेनू का आईडिया है। एक दिन हम पाँचों – मैं सीमा, कैलाश, पुष्पा और रेनू, हमारे घर में मस्तियां कर रहे थे – एक दुसरे फुद्दी चूस चाट रहे थे, एक दूसरी के फुद्दी में चूतड़ों में उंगली कर रहे थे। तभी रेनू बोली, “नाती हम चारों गोपाल का मोटा लंड अपनी फुद्दीयों में ले चुकी हैं। तुम भी अमर और हेमंत का लंड अपनी फुद्दी में ले चुकी हो, तो फिर अब हम कुछ अलग सा, कुछ नया क्यों ना करें?”
“गोपाल, मैंने रेनू से पूछा, “रेनू नया? अलग सा? मतलब?”
“रेनू ने पुष्पा से कहा, “पुष्पा तुम बताओ नाती को।”
“पुष्पा बोली, “नाती, असल में क्या है, रेनू सीमा कैलाश और मैं, हम चारों अपने पतियों के साथ आपस में ग्रुप सेक्स करते हैं। अमर हेमंत केशव सुनील, और हम चारों। हम सब एक ही कमरे में आपस में एक-दूसरे के सामने, एक-दूसरे के घरवाले के साथ सेक्स करते हैं। हम चारों में हर एक चार-चार लंड फुद्दी मैं डलवाती हैं और हमारे घरवाले चार-चार फुद्दीयों को चोदने के मजे लेते हैं।”
“गोपाल, पुष्पा बता रही थी, “हम तो अपने अपने घरवालों को ये भी बता चुकी हैं कि हमने तो गोपाल से भी चुदाई करवाई है। अब तुम भी मेरे और सीमा के सामने अमर और हेमंत का लंड ले चुकी हो, तो बताओ अब आपस में क्या पर्दा रह गया है?”
“गोपाल मैं भी सोच रही थी, पुष्पा की ये बात तो सही है अब आपस में क्या पर्दा रह गया है, लेकिन में अब तक भी ये नहीं समझी थी कि पुष्पा क्या कहना चाह रही है। मैंने पुष्पा से कहा, “पुष्पा ज़रा साफ़ साफ़ बोलो क्या मतलब है तुम्हारा।”
“मेरी बात पर पुष्पा आगे बोली, “ठीक है नाती तो फिर साफ़-साफ़ सुनो। मैं कहना चाह रही हूँ, जब इतना कुछ हो ही गया है, हो ही रहा है क्यों ना तुम और गोपाल भी इस ग्रुप में आ जाओ। गोपाल जैसा लंड हममें से किसी के भी घरवाले का नहीं है। तुम लोग भी ग्रुप में आ जाओगे तो हमें भी गोपाल से खुल कर चुदवाने का मजा आएगा। अमर, केशव, सुनील और हेमंत को भी इसमें कोइ एतराज़ नहीं, हम उनसे बात कर चुकी हैं। बस तुमने और गोपाल ने हां करनी है।”
“किरण, मैं हैरान हो चुका था कि ये मेरे दोस्त आपस में इतना कुछ करते रहे हैं और मुझे इसकी भनक तक नहीं लगी थी?”
“नाती ने मेरा लंड फिर हाथ में ले लिया और मेरा लंड दबाते हुए दुबारा बोली, “गोपाल, पुष्पा सीमा रेनू और उनके पति हमने अपने ग्रुप में लेना चाहते हैं, जिसमें कभी-कभी मिल कर एक-दूसरे के सामने एक-दूसरे की बीवी के साथ चुदाई किया करें, एक ही कमरे में, हो सके तो एक ही बिस्तर पर। तुम्हारे इतने मोटे और लम्बे लंड के कारण पुष्पा, सीमा और रेनू तुम्हे ग्रुप में लेने के लिए बहुत उतावली हैं। उनके पति तो राजी हो ही चुके हैं – बस तुम्हारी हां चाहिए।”
“मैंने नाती से पूछा, “और नाती तुम? तुम भी इस ग्रुप चुदाई में शामिल होना चाहती हो?”
“नाती बोली, “सच बताऊं गोपाल, इतना कुछ तो हो ही रहा है – तुम चारों लड़कियों को चोदते हो, वो भी मेरे सामने, मैं अमर और हेमंत से चुदाई करवा ही चुकी हूं तो अब बचा ही क्या है? ये भी कर लेते हैं – ये करने में भी क्या हर्ज़ है। जब मजे ही लेने हैं तो फिर पूरे मजे ही लो?”
“और गोपाल, एक बात और बताऊं, सीमा सब से उम्र में बड़ी है, मगर चुदाई के वक़्त इतना शोर मचाती है, ऐसी-ऐसी बातें बोलती है, कि कई बार तो हमें शर्म तो आती ही है, लेकिन मजा भी बहुत आता है।”
“और वो दिव्या? रेनू उसको भी तो लाएगी। तुम्हारा मोटा लंड तो उसकी टाइट फुद्दी में मस्त रगड़े लगाता हुआ जाएगा उसकी फुद्दी में। तुम दोनों को ही मजा आ जाएगा चुदाई का।”
“मैंने सोचा, “यार नाती कह तो ठीक ही रही हैं, मैं चारों को चोदता ही हूं, नाती भी एक बार बाहर से चुदाई करवा ही चुकी है अब सच में ही क्या बचा है – बस किरण इसके बाद मैंने हां कर दी।”
मामा जी का ग्रुप सेक्स।
“किरण, अब चार का ग्रुप पांच का हो गया। पहली ग्रुप के मीटिंग सीमा के घर पर हुई। और इसके बाद सारी मीटिंगें सीमा या पुष्पा के घर हुई। हेमंत सीमा और अमर पुष्पा के घर बहुत बड़े-बड़े हैं। घर ही नहीं फर्नीचर भी पुराने जमाने का है दस-दस फुट लम्बे, आठ फुट चौड़े बेड, बारह-बारह फुट लम्बे सोफे – मतलब आज के जमाने में तो ऐसा फर्नीचर बनता ही नहीं है।”
“और फिर किरण हेमंत का तो रिसोर्ट और होटल भी है। होटल के ऊपर वाली मंजिल में तीन कमरे और एक हॉल है। सब में फर्नीचर लगा हुआ है। ऊपर की मंजिल के कमरे हेमंत किराये पर नहीं देता। कभी-कभी वहां भी चले जाते हैं। वहां तो ये सब करने में और भी ज्यादा मजा आता है।”
“किरण, सुनील की बीवी रेनू भी वापस आ चुकी थी और उसके नाराज़गी दूर हो चुकी थी। अब तो सुनील दिव्या को रेनू के सामने ही चोद देता है।”
“किरण, इसके बाद हुई पहली ही ग्रुप चुदाई में कमाल हो गया। सुनील के साथ उसकी बीवी रेनू तो थी ही, साथ ही जवान खूबसूरत बाइस साल की दिव्या भी थी – मतलब पांच लंड और छह फुद्दीयां।”
“जवान दिव्या सब को अंकल आंटी या भाभी बोलती थी।”
“जैसे ही चुदाई शुरू हुई और सब ने अपने अपने कपड़े उतारे तो सब के सब – पांचों मर्द, मेरे समेत दिव्या को ऐसे देखने लगे जैसे उसकी फुद्दी में ही घुस जाएंगे।”
“ये कह कर मामा जी हंस दिए।”
“दिव्या थी भी कमाल की – बिलकुल तुम्हारी तरह पांच फुट सात इंच लम्बी, कड़क जिस्म वाली। ये खड़े सख्त मम्मे और वैसे ही कड़क चूतड़। सुंदर गोरी-चिट्टी तो वो थी ही।”
“सब लड़कियां एक लाइन में बेड के किनारे लेट गयीं। सब ने अपने चूतड़ों के नीचे खुद ही तकिये रख दिए और टांगें ऊपर उठा दी, “आओ जी डालो हमारे फुद्दीयों में लंड और चोदो हमें।”
“सीमा सोफे पर बैठ गयी और बोली, चलो एक-एक शिफ्ट लगा लो सब लोग उसके बाद मैं गोपाल के नीचे लेटूंगी।”
“मगर यहां भी एक उसूल था किरण। पहली चुदाई में कोइ भी मर्द अपनी बीवी को नहीं चोदेगा – किसी दूसरे की बीवी को ही चोदेगा। बेड पर पहले ही नंबर पर नाती थी फिर पुष्पा, रेनू, दिव्या और आखिर में कैलाश।”
“केशव नाती को चोदने लगा, मैं पुष्पा को, अमर रेनू को, हेमंत दिव्या को और सुनील कैलाश को। सीमा सोफे पर बैठी हुई अपने फुद्दी में उंगली करते हुए अपनी बारी का इंतज़ार कर रही थी।”
“किरण, मेरे मोटे लंड की रगड़ाई को पुष्पा सात आठ मिनट ही झेल पायी और उसे मजा आ गया। मैंने कुछ देर लंड पुष्पा की फुद्दी में ही रहने दिया। जैसे ही पुष्पा ढीली होनी शुरू हुई मैंने पुष्पा की फुद्दी में से लंड निकाल लिया।”
“पुष्पा उठी और सोफे पर बैठी सीमा से बोली, “चलो सीमा अब तुम लो गोपाल का लंड फुद्दी में, क्या लंड है यार इस नाती के घर वाले का – एक बार तो फुद्दी खोल कर रख देता है जब अंदर जाता है। बड़ा मजा आता है गोपाल का लंड फुद्दी में डलवाने का। चलो आ जाओ, तब तक मैं अगले लंड का इंतज़ार करती हूं।”
“और पुष्पा जा कर सोफे पर बैठ गयी और पुष्पा की जगह सीमा आ गई। अब मैं सीमा को चोद रहा था।”
“सीमा चुदाई के वक़्त सच में ही बहुत बोलती थी। जब मैं सीमा को चोद रहा था और सीमा चिल्ला-चिल्ला कर बोल रही, “घुस जा भोसड़ी के गोपाल, घुस जा मेरी फुद्दी में l फाड़ साले आज मेरी फुद्दी चोद चोद कर। रगड़ कर चोद, पूरा लंड निकाल कर डाल गांडू, क्या हिजड़ों की तरह धक्के लगा रहा है। साले इतना बड़ा तेरा लौड़ा है तुझे नाती ने कभी बताया नहीं गर्म फुद्दी को कैसे ठंडा करते है …. हां ऐसे चोद, मर्दों के तरह।”
“मेरे समेत सब हल्का-हल्का मुस्कुरा रहे थे।”
“अगला नंबर हेमंत का आया जो जवान दिव्या को चोद रहा था। दिव्या जवान थी, और चुदाई का पूरा मजा लेती भी थी और चूतड़ घुमा-घुमा कर चुदाई का पूरा मजा देती भी थी।”
“जब दिव्या को हेमंत की चुदाई से मजा आया तो इधर सीमा को भी मेरे नीचे मजा आ गया।”
“हेमंत ने अपना लंड दिव्या की फुद्दी में से निकाला और पुष्पा के पास चला गया।
हेमंत मुझसे बोला, “जाओ गोपाल डालो दिव्या की टाइट फुद्दी में अपना खूंटा और खुद भी मजे लो और टाइट फुद्दी वाली दिव्या को भी मजे दो, मस्त चुदाई करवाती है ये दिव्या।”
“मैंने सीमा की फुद्दी में से लंड निकाला और मैं दिव्या के पास चला गया। दिव्या की फुद्दी देखने में ही मस्त थी। आपस में जुड़ी हुई फुद्दी की फांकें – बस एक लाइन सी ही दिखाई दे रही थी किरण, बिल्कुल तुम्हारी फुद्दी की तरह।”
“मामा जी जब ये सब मुझे सुना रहे थे तो मामा जी का लंड तो मेरी फुद्दी मैं ही था। मामा जी ने जैसी ही कहा, “दिव्या की फुद्दी देखने में ही मस्त थी। आपस में जुड़ी हुई फुद्दी की फांकें – बस एक लाइन सी ही दिखाई दे रही थी किरण, बिल्कुल तुम्हारी फुद्दी की तरह – ये सुनते ही मेरी फुद्दी पानी छोड़ गयी, और मुझे मजा आ गया।”
“मैं जोर से चिल्लाई, “ये क्या हुआ मामा जी, मुझे तो मजा ही आ गया, पानी छोड़ गयी मेरी फुद्दी।”
“कुछ देर के बाद जब फुद्दी के मजे की मेरी मस्ती उतरी तो मैंने मामा जी से पूछा, “मामा जी फिर क्या हुआ जब आपने अपना ये घोड़े जैसा लंड दिव्या की फुद्दी में डाला जिसकी फांकें आपस में जुड़ी हुई थी – मेरी फुद्दी की तरह। ये कहते हुए मैं हंस भी दी।”
मामा जी बोले, “किरण मैं मस्ती में दिव्या की फूडी चूसने लगा। जैसे ही मैंने दिव्या की फुद्दी थोड़ी चूस कर उसमें लंड डाला – पूरा लंड बैठते ही दिव्या चिल्लाई, आह गोपाल अंकल ये कैसा लंड है, मेरी तो फुद्दी ही भर गयी है, ऐसा लग रहा है पूरी फ़ैल गयी है मेरी फुद्दी।”
“दिव्या आपने जेठ सुनील को भैया बोलती है और बाकी सबको, मुझे, अमर को, हेमंत को और केशव को अंकल बुलाती है।”
“किरण जैसे ही मैंने दिव्या की फुद्दी मैं धक्के लगाने शुरू किये उसे मजा आ गया और वो चिल्लाई, “रेनू भाभी, ये क्या हुआ, गोपाल अंकल ने तो मुझे अभी चोदना भी शुरू नहीं किया और मुझे तो मजा आने लगा है।”
“किरण मैं जानता ही था कि मेरे लंड से पहला मजा सबको ऐसे ही आता है – फटाफट। मैंने दिव्या चुदाई चालू रखी। अगले सात आठ मिनट में दिव्या को फिर मजा आ गया। इस बार तो दिव्या इतनी जोर से चिल्लाई, “आह गोपाल अंकल ये कैसा लौड़ा है आपका, मुझे ऐसा मजा आया है जैसा आज तक कभी भी नहीं आया।”
सभी दिव्या की तरफ देखने लग गए। मैंने दिव्या की फुद्दी चोदनी बंद कर दी। अब मुझे दिव्या की फुद्दी में से लंड निकाल कर किसी और की फुद्दी में डालना था। मगर दिव्या की जेठानी रेनू जो दिव्या के बगल में ही लेती हुई थी बोली, “गोपाल इसकी फुद्दी में आग लगी हुई है। रगड़ो इसकी फुद्दी और दो तीन बार दबा कर, तभी इसकी फुद्दी में लगी हुई आग बुझेगी।”
“मैंने कहा, “रेनू अब मैं दिव्या को लिटा कर ऊपर से इसे चोदना चाहता हूं।”